Ram Mandir Theft FIR: भारतीय आस्था के सबसे बड़े केंद्र अयोध्या धाम स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों और चढ़ावे की धनराशि में हुए गबन व हेराफेरी के मामले में आखिरकार उत्तर प्रदेश सरकार ने कार्रवाई की है। लगभग 20 दिनों तक चली सघन जांच और चौतरफा राजनीतिक दबाव के बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश पर गुरुवार शाम रामजन्मभूमि थाने में आठ नामजद व अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक प्राथमिकी दर्ज कर ली गई।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत और लखनऊ के मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली विशेष जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी आठों मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान आरोपियों के ठिकानों से लाखों रुपये की नकदी भी बरामद की गई है, जिसने मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छोटे कर्मचारियों पर गिरा गाज, चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को राहत से भड़का विपक्ष
इस पूरे घोटाले की जांच के लिए गठित की गई एसआईटी ने करीब 150 कर्मचारियों से लंबी पूछताछ और दस्तावेजों की फोरेंसिक स्क्रूटनी के बाद अपनी 20 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रिपोर्ट के तथ्यों को देखने के बाद तुरंत गिरफ्तारी करने के आदेश दिए।
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Ram Mandir Theft FIR: इसके बाद सक्रिय हुई पुलिस कड़ियों ने मुख्य मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव सहित 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि, इस बड़ी विधिक कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। विपक्ष और शिकायतकर्ताओं ने इस बात को लेकर मोर्चा खोल दिया है कि एफआईआर में ट्रस्ट के शीर्ष और प्रभावशाली पदाधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों का आरोप है कि पूरे प्रकरण में जिन बड़े चेहरों को लेकर तरह-तरह की बातें और संदेहास्पद तथ्य सामने आ रहे थे, उन्हें सत्ता के दबाव में पूरी तरह बचा लिया गया है।
विपक्ष ने सवाल उठाया है कि जब चंपत राय के पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव के पास से दानपात्रों की मुख्य चाभियां बरामद हुईं और मंदिर के समस्त आंतरिक कार्यों में उसका सीधा दखल था, तो इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और मंदिर के निर्माण प्रभारी गोपाल राव के खिलाफ विधिक कदम क्यों नहीं उठाए गए? विपक्ष का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े नामों को क्लीनचिट देने के लिए की गई है, जिसके विरोध में वे आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं।
गिरफ्तार हुए सभी 8 आरोपियों का कुंडली
1. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू (ट्रस्ट महासचिव का पूर्व ड्राइवर): यह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर रहा है। मंदिर के लगभग सभी आंतरिक कार्यों और व्यवस्थाओं में इसका सीधा दखल व रसूख था। जांच के दौरान मंदिर के दानपात्रों की मुख्य चाभियां भी इसी के पास से बरामद की गई हैं।
2. अनुकल्प मिश्र (गबन का मुख्य मास्टरमाइंड): यह मंदिर में आने वाली नकदी की गणना के कार्य में संलग्न प्रमुख कर्मचारी था। एसआईटी ने इसे इस पूरे गबन प्रकरण का मुख्य सूत्रधार व मास्टरमाइंड माना है। इसके कौशलपुरी स्थित आवास से 20 लाख रुपये की भारी-भरकम नकद राशि बरामद की गई है।
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3. लवकुश मिश्र (सहयोगी): यह रिश्ते में मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्र का सगा बहनोई है। इसे अनुकल्प के पिता रवींद्र मिश्र की सिफारिश पर मंदिर के कार्य में रखवाया गया था। इसके ठिकाने से भी पुलिस ने लगभग 10 लाख रुपये की नकद राशि रिकवर की है।
4. मनीष यादव (सहयोगी): यह आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का सगा भतीजा है। टिन्नू ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके इसे करीब चार-पांच महीने पहले ही मंदिर में नकदी प्रबंधन के कार्य में रखवाया था। इसके पास से भी गबन की कुछ राशि बरामद हुई है।
5. सुभाष श्रीवास्तव (निगरानी कर्मी): यह केनरा बैंक से रिटायर्ड अधिकारी है। बैंक से सेवानिवृत्ति के बाद इसे ट्रस्ट में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी। यह न केवल ट्रस्ट का नियमित कर्मी था, बल्कि दानपात्रों से निकलने वाली नकदी की गणना की पूरी निगरानी प्रणाली से भी सीधे जुड़ा हुआ था।
6. अविनाश शुक्ल (गणना कर्मी): यह अयोध्या शहर का ही स्थानीय निवासी है और मंदिर के खजाने की गिनती करने वाली टीम का सक्रिय सदस्य था। वित्तीय हेराफेरी के पुख्ता सबूत मिलने के बाद इसके बैंक खाते से 5 लाख रुपये की राशि विधिक रूप से रिकवर की गई है।
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7. करुणेश पांडेय (गणना कर्मी): यह भी नकदी की गिनती करने वाले स्टाफ में शामिल था। जांच में सामने आया है कि यह मुख्य मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र का बेहद करीबी और भरोसेमंद साथी था, जो इस संगठित गबन में बराबर का भागीदार था।
8. रमाशंकर मिश्र (गणना कर्मी): यह भी नकदी की गणना की कोर टीम का हिस्सा था। दान की राशि को चुपके से पार करने के विधिक साक्ष्य मिलने के बाद इसे गिरफ्तार किया गया और इसके पास से भी चोरी की कुछ नकदी बरामद की गई है।
मुकदमा दर्ज होने वाली सभी धाराएं
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है:-
बीएनएस की धारा-306 (संपत्ति की चोरी): यह धारा किसी के अधिकार क्षेत्र या भवन से कीमती संपत्ति की चोरी करने पर लगाई जाती है। इसमें दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 7 वर्ष की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
बीएनएस की धारा-316(5) (विधिक विश्वासघात): ट्रस्ट या सार्वजनिक पद पर रहते हुए भारी मात्रा में आपराधिक विश्वासघात करने पर यह कड़ा कानून लागू होता है। इसमें सीधे आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की कठोर सजा का नियम है।
बीएनएस की धारा-317(4) व 317(5) (चोरी की संपत्ति छिपाना): गबन या चोरी की गई काली कमाई और संपत्ति को जानबूझकर छुपाने, उसे ठिकाने लगाने या उसके निस्तारण में मदद करने पर यह धारा लगती है। इसमें 3 से 7 वर्ष तक की सजा हो सकती है।
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बीएनएस की धारा-61 (आपराधिक षड्यंत्र): दो या दो से अधिक लोगों द्वारा मिलकर किसी अपराध को अंजाम देने के लिए योजनाबद्ध रूप से आपराधिक साजिश रचने पर यह धारा लगती है। इसमें सहयोगियों को भी मुख्य अपराध के बराबर ही सजा दी जाती है।
बीएनएस की धारा-3(5) (सामूहिक रूप से संगठित अपराध): जब कई लोग एक साथ मिलकर, पूर्व नियोजित तरीके से किसी बड़े संगठित अपराध को अंजाम देते हैं, तो सामूहिक जवाबदेही तय करने के लिए यह धारा जोड़ी जाती है।
बीएनएस की धारा-305 (पूजा स्थल में चोरी): किसी भी धार्मिक स्थल, पूजा/उपासना के लिए समर्पित भवन या पवित्र परिसर के भीतर रखी हुई मूल्यवान संपत्ति या चढ़ावे की चोरी करने पर यह विशेष धारा लगती है। इसमें 7 वर्ष तक का कारावास भुगतना पड़ता है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ए) सहपठित धारा 13(2) (लोक सेवक द्वारा गबन): किसी लोक सेवक या सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े व्यक्ति द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करके, अपने नियंत्रण में आई सार्वजनिक संपत्ति या चंदे की राशि का बेईमानी से गबन या हेराफेरी करने पर यह कानून कड़ा शिकंजा कसता है। इसमें 4 से 10 वर्ष तक की जेल और भारी आर्थिक जुर्माने का विधिक प्राविधान है।
चढ़ावा चोरी केस की पूरी टाइमलाइन
07 जून: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का सनसनीखेज आरोप लगाया। इसी शाम सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट कर इस प्रकरण पर तीखी टिप्पणी की, जिससे मामला मीडिया की सुर्खियों में आ गया। विवाद बढ़ता देख इसी रात ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों पर अपना पहला स्पष्टीकरण जारी किया।
08 जून: चंपत राय ने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें मनगढ़ंत बताया। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र इसी दिन देर शाम अचानक आपात स्थिति में अयोध्या पहुंचे और कड़ियों की थाह ली।
09 जून: भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेता डॉ. रजनीश सिंह ने इस मामले में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख दिया। उन्होंने पत्र में मांग की कि इस पूरे वित्तीय कुप्रबंधन और चढ़ावा चोरी की जांच सीबीआई या ईडी जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए।
10 जून: प्रधानमंत्री कार्यालय ने बीजेपी नेता के पत्र का संज्ञान लेते हुए इस पर जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली। इसी दिन मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र दोबारा तत्काल अयोध्या पहुंचे और अधिकारियों के साथ चार घंटे लंबी मैराथन बैठक की।
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11 जून: राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखापाल महिपाल सिंह का एक सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ। उन्होंने दावा किया कि साल 2021-2022 में भी उन्होंने ऐसी ही चोरी रंगे हाथों पकड़ी थी, लेकिन तब साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज को डिलीट करवा दिया गया था।
13 जून: चौतरफा दबाव और पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद, राम मंदिर ट्रस्ट के औपचारिक आग्रह पर शासन द्वारा लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल का आधिकारिक गठन कर दिया गया।
15 जून: एसआईटी की टीम ने अयोध्या में डेरा डाला। जांच टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राय से प्राथमिक जानकारियां लीं। इसके साथ ही खजाने से जुड़े 8 से 10 संदिग्ध कर्मचारियों को हिरासत में लेकर करीब छह घंटे तक पूछताछ की।
16 जून: जांच का दायरा बढ़ा और एसआईटी ने चंपत राय व गोपाल राय से लगातार चार-चार घंटे तक गहन सवाल-जवाब किए। टीम ने ट्रस्ट के पिछले 11 महीनों के सभी वित्तीय दस्तावेज, वाउचर और लेजर बुक खंगाले। (Ram Mandir Theft FIR)
17 जून: जांच टीम ने संबंधित बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों और नोटों की डिजिटल गिनती से जुड़ी निजी सुरक्षा एजेंसी के प्रतिनिधियों को तलब कर पूछताछ की। बैंक स्टेटमेंट और दैनिक जमा के वित्तीय रिकॉर्ड की फोरेंसिक पड़ताल की गई।
18 जून: एसआईटी की टीम लगातार 10 घंटे तक मंदिर परिसर के भीतर जमी रही। टीम ने ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से चार घंटे और चंपत राय के पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव से डेढ़ घंटे तक कड़ी पूछताछ की तथा दोनों के बयानों का आपस में क्रॉस-चेक कराया।
19 जून: चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और मंदिर के निर्माण प्रभारी गोपाल राय को अलग-अलग बैठाकर दोबारा पूछताछ की गई। इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक और मुख्य कैशियर के बयान भी विलेख में दर्ज किए गए।
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20 जून: टीम ने सभी 8 मुख्य आरोपियों और संदिग्धों के व्यक्तिगत व पारिवारिक बैंक खातों का पूरा ब्योरा, बेनामी संपत्तियों के विलेख और तकनीकी सबूत जुटाए। सारे साक्ष्य संकलित करने के बाद एसआईटी की टीम समीक्षा के लिए लखनऊ रवाना हो गई।
23 जून: एसआईटी ने मामले की गहराई से पड़ताल करने और लगभग 150 कर्मियों के बयान दर्ज करने के बाद अपनी 20 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को सौंप दी। इस रिपोर्ट में गबन की पुष्टि की गई। (Ram Mandir Theft FIR)
25 जून: एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के निष्कर्षों को देखने के बाद स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल विधिक कार्रवाई के कड़े आदेश जारी किए। इसके बाद गुरुवार शाम को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर रामजन्मभूमि थाने में सभी आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई और पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी आठों आरोपियों को आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। (Ram Mandir Theft FIR)
