Israel-Lebanon conflict: इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी प्रभाव और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों को लेकर तीखा हमला बोला है। यरुशलम में एक समिट को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया कि वे ट्रंप के इशारों पर काम करते हैं।
उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि यह सोचना गलत है कि ट्रंप वही करते हैं जो वे कहते हैं या वे वही करते हैं जो ट्रंप चाहते हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजराइल और अमेरिका के हित हर मोर्चे पर एक जैसे नहीं हो सकते और वे किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
लेबनान और ईरान पर सख्त रुख
Israel-Lebanon conflict: नेतन्याहू ने दो प्रमुख मोर्चों पर अपना कड़ा रुख दोहराया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि इजराइल किसी भी सूरत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा, चाहे इसके लिए कोई भी समझौता करना पड़े। इसके साथ ही, उन्होंने लेबनान से अपनी सेना हटाने की अंतरराष्ट्रीय मांग को ठुकरा दिया है। नेतन्याहू ने ऐलान किया है कि जब तक इजराइल को जरूरत महसूस होगी, उनकी सेना दक्षिणी लेबनान के क्षेत्रों में तैनात रहेगी।
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स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान की वार्ता जारी
Israel-Lebanon conflict: दूसरी तरफ, स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का दूसरा दिन है। रविवार को दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच करीब 80 मिनट तक चर्चा हुई। इसका उद्देश्य 60 दिनों के युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलना है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत में प्रगति का दावा किया है, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वे हिजबुल्लाह को तुरंत रोकें, अन्यथा और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ईरान का दावा और लेबनान का हाल
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ समझौते के तहत कतर में फंसे उनके 6 अरब डॉलर उन्हें वापस मिलेंगे। वहीं, लेबनान में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 मार्च से अब तक 4,106 लोगों की मौत हो चुकी है और 12,153 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा, इजराइली सेना प्रमुख इयाल जमीर ने चेतावनी दी है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ लड़ाई दोबारा शुरू होने की संभावना बनी हुई है।
