Trump tariff on India: वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अमेरिकी प्रशासन ने जबरन श्रम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत 60 व्यापारिक साझेदार मुल्कों की गहन समीक्षा की थी।
जांच के निष्कर्षों के आधार पर अमेरिका ने उन देशों के आयातित उत्पादों पर अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाने का एलान किया है जो अपनी सप्लाई चेन में जबरन श्रम को रोकने के लिए पर्याप्त कड़े नियम लागू करने में विफल रहे हैं।
भारत को 10 फीसदी वाले निचले स्लैब में मिली जगह
Trump tariff on India: शुरुआती जांच और समीक्षा के दौरान आशंका जताई जा रही थी कि अमेरिका भारत से आने वाले सामानों पर 12.5 प्रतिशत तक का भारी अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है। हालांकि, श्रम मानकों और आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी को लेकर भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत सकारात्मक रही। भारत सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद अमेरिकी प्रशासन ने भारत को 12.5% के बजाय 10% वाले निचले टैरिफ स्लैब में रखा है।
पाकिस्तान, बांग्लादेश और ब्रिटेन समेत 17 देशों पर भी एक्शन
अमेरिकी ट्रेड अथॉरिटी ने भारत के अलावा 16 अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों को भी 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क वाले दायरे में शामिल किया है। इनमें अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, कनाडा, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और ब्रिटेन शामिल हैं। USTR के अनुसार, जिन देशों ने फोर्स्ड लेबर के खिलाफ बिल्कुल प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं, उन पर 12.5 फीसदी तक का उच्चतम अतिरिक्त टैरिफ थोपा गया है।
USTR का बयान और भारत की तैयारी
Trump tariff on India: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इस फैसले की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि दशकों से की जा रही अपीलों के बावजूद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जबरन श्रम को खत्म नहीं किया जा सका है। अमेरिका लंबे समय से ऐसे उत्पादों पर आयात प्रतिबंध लागू करता रहा है और अब चाहता है कि उसके व्यापारिक साझेदार भी समान रूप से कड़े नियम अपनाएं। दूसरी ओर, भारत ने पहले ही फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों की पहचान, ट्रैकिंग और सख्त निगरानी के लिए नए दिशानिर्देश तैयार कर लिए हैं।
स्टील, एल्युमिनियम और ऊर्जा उत्पाद नए टैरिफ से बाहर
राहत की बात यह है कि इस नए 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ का असर सभी भारतीय निर्यात उत्पादों पर एक समान नहीं पड़ेगा। जिन वस्तुओं पर पहले से अलग सेक्टोरल टैरिफ जैसे स्टील और एल्युमिनियम लागू हैं, वे इस नए आदेश से अप्रभावित रहेंगी। इसके साथ ही ऊर्जा उत्पाद, उर्वरक, आवश्यक खाद्य सामग्री और USMCA व्यापार समझौते के दायरे में आने वाले सामानों को भी इस अतिरिक्त सीमा शुल्क से बाहर रखा गया है।
