रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने नई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अनुरूप न्याय व्यवस्था को पूरी तरह तकनीक आधारित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंगलवार को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पुलिस, न्यायालय, जेल, फोरेंसिक और स्वास्थ्य विभाग के डिजिटल एकीकरण पर जोर देते हुए कई अहम निर्देश दिए।
बैठक में सीसीटीएनएस के संचालन में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों, विभिन्न डिजिटल मॉड्यूल के समन्वय और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधों की विवेचना, साक्ष्य संकलन और न्यायालयीन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और नागरिक हितैषी बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
बैठक में ई-एफआईआर, ई-चालान, ई-साक्ष्य, मेडलीपार, ई-प्रिजन, ई-फोरेंसिक, सीआईएस और न्याय श्रुति जैसे सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म को सीसीटीएनएस से प्रभावी रूप से जोड़ने के निर्देश दिए गए। सरकार का लक्ष्य है कि न्याय प्रक्रिया के हर चरण में तकनीक का उपयोग बढ़ाकर मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित किया जाए।
डिजिटल साक्ष्यों के बढ़ते महत्व को देखते हुए राज्य के सभी जिलों में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ई-साक्ष्य प्रणाली का विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा, ताकि अन्य जिले भी उसी मॉडल को अपनाएं।
बैठक में ‘न्याय श्रुति’ प्रणाली को जल्द शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए उच्च न्यायालय के माध्यम से न्यायाधीशों की आवश्यक आईडी तैयार कर जल्द गो-लाइव करने के निर्देश दिए गए, जिससे न्यायालयीन कार्यवाही में तकनीक का अधिक प्रभावी उपयोग हो सके।
आम नागरिकों की सुविधा के लिए रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर कमिश्नरेट के सभी थानों तथा राज्य के प्रत्येक जिले के दो-दो थानों में इसी माह के अंत तक दो-दो ई-साइनिंग पैड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। इससे शिकायतकर्ताओं के डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया आसान होगी और दस्तावेजों का ऑनलाइन निष्पादन तेज होगा। बाद में यह सुविधा पूरे राज्य में लागू की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री ने इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के पांचों स्तंभ—पुलिस, न्यायालय, जेल, फोरेंसिक और अभियोजन—के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया, ताकि न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और समयबद्ध बन सके।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मेडिकल जांच और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को तेज करने के लिए सभी जिला अस्पतालों को मेडलीपार प्रणाली से जोड़ने का भरोसा दिया। उन्होंने प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त कर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश भी दिए। उप मुख्यमंत्री ने अगले तीन से चार महीनों में इस पूरी व्यवस्था को पूरी तरह कार्यशील बनाने का लक्ष्य तय किया।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी चरणबद्ध तरीके से सीसीटीएनएस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि मेडिकल साक्ष्यों के आदान-प्रदान और जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। दुर्ग जिले में ऑनलाइन सीसीटीएनएस प्रणाली के बेहतर क्रियान्वयन की सराहना भी की गई।
वहीं, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए सभी प्रकार के मामलों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय करने, जांच की समय-सीमा कम करने, फोरेंसिक विशेषज्ञों की भर्ती शीघ्र पूरी करने और लंबित मामलों में तेजी से कमी लाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, सचिव हिमशिखर गुप्ता, पुलिस महानिरीक्षक ध्रुव गुप्ता सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि एनसीआरबी और सीसीटीएनएस के वरिष्ठ अधिकारी दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
