कवर्धा। कबीरधाम जिला के बोड़ला जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कांपा में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) योजना के तहत निर्माणाधीन आरसीसी पुलिया कार्य अब विवादों और गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने निर्माण कार्य में भारी लापरवाही, तकनीकी नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कांपा के सरोधा जयलाश के नीचे स्थित नाले पर आरसीसी पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि पुलिया निर्माण कार्य चलती नहर और बहते पानी के बीच किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर पानी का बहाव लगातार जारी है, बावजूद इसके बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे निर्माण कार्य कराया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बहते पानी के बीच किया गया आरसीसी निर्माण भविष्य में पुलिया की मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि, निर्माण एजेंसी द्वारा गुणवत्ता को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। निर्माण कार्य में तकनीकी मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा और कार्य केवल कागजों में गुणवत्तापूर्ण दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अभी से निर्माण की यह स्थिति है तो आने वाले समय में पुलिया हादसे का कारण बन सकती है।
निर्माण स्थल पर नागरिक सूचना पटल तक नहीं लगाया गया है, जो सीधे तौर पर शासन के नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। नियमानुसार किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में लागत, स्वीकृत राशि, निर्माण एजेंसी, तकनीकी स्वीकृति और कार्य अवधि संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है। लेकिन यहां ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया, जिससे साफ प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य को पारदर्शिता से दूर रखकर मनमानी तरीके से कराया जा रहा है।
विशेष जानकारों और ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया निर्माण कार्य स्वीकृत प्राक्कलन से हटकर किया जा रहा है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कम गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग कर सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले में भ्रष्टाचार की बू साफ महसूस हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गोपाल वर्मा द्वारा निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई के लगातार निर्देश दिए जाते रहे हैं, लेकिन निर्माण एजेंसी और संबंधित सब इंजीनियर इन आदेशों को खुली चुनौती देते नजर आ रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता और लगातार हो रही अनदेखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, गुणवत्ता की जांच हेतु विशेषज्ञ टीम भेजी जाए तथा दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी धन की बर्बादी के साथ-साथ आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
