रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं हिंदी विषय की परीक्षा का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया में वायरल होने और पेपर लीक की गंभीर घटना में रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना कोतवाली पुलिस एवं रायपुर क्राइम ब्रांच ACCU की संयुक्त टीम ने मामले के मुख्य आरोपी वेणु जंघेल को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। आरोपी को बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद उसे चार दिन के पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की गई। पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं हिंदी परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने की सूचना प्राप्त हुई थी। मामले की संवेदनशीलता और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े होने के कारण थाना कोतवाली में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर तत्काल जांच शुरू की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त मध्य जोन के निर्देशन में थाना कोतवाली की विशेष टीम गठित की गई, जिसमें रायपुर क्राइम ब्रांच ACCU को भी शामिल किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी और साइबर विश्लेषण के माध्यम से मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि पेपर लीक की जानकारी वायरल होने के बाद कई लोग डिजिटल साक्ष्य मिटाने में जुट गए थे। इसके बाद पुलिस ने साइबर तकनीक की मदद से डिलीटेड मोबाइल डेटा, चैट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और ऑनलाइन ट्रांजैक्शनों की गहन जांच शुरू की। जांच एजेंसियों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डिलीट की गई जानकारी को रिकवर कर महत्वपूर्ण सुराग जुटाए।
पुलिस टीम ने इस मामले में लगभग 50 से अधिक छात्रों, संदिग्ध व्यक्तियों एवं अन्य संबंधित लोगों से सिलसिलेवार पूछताछ की। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस मुख्य आरोपी तक पहुंचने में सफल रही। गिरफ्तार आरोपी की पहचान वेणु उर्फ वेणु जंघेल, पिता हरीशचंद्र जंघेल, उम्र लगभग 19 वर्ष, निवासी ग्राम बरसरा जिला बेमेतरा एवं वर्तमान निवासी लक्ष्मी नगर, गोकुल नगर क्षेत्र थाना गुढ़ियारी रायपुर के रूप में हुई है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी छात्रों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर उनसे करीब ₹3000 तक की राशि वसूल रहा था। पुलिस को संदेह है कि आरोपी लंबे समय से इस गतिविधि में संलिप्त था और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है। यही कारण है कि पुलिस अब आरोपी के संपर्क में रहे अन्य व्यक्तियों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी बारीकी से जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रकरण दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था तथा मोबाइल एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास भी कर रहा था। आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस उपायुक्त मध्य जोन द्वारा ₹5000 के इनाम की घोषणा भी की गई थी।
थाना कोतवाली और ACCU की संयुक्त टीम ने लगातार तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद पुलिस टीम ने बिलासपुर में घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पेपर लीक से जुड़े कई महत्वपूर्ण राज उजागर किए हैं। उसने प्रश्नपत्र प्रसारण के तरीके, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग, आर्थिक लेन-देन और अन्य लोगों की संलिप्तता के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
पुलिस को आरोपी के मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं। रिकवर किए गए डिलीटेड डेटा और चैट रिकॉर्ड के आधार पर अब मामले में अन्य लोगों की भूमिका की जांच तेज कर दी गई है। पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मामले की जांच लगातार जारी है और थाना कोतवाली रायपुर द्वारा आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
