रायपुर। छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बलौदाबाजार हिंसा मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी है। इस मामले में सह-आरोपी अजय यादव और दिनेश वर्मा को भी जमानत का लाभ मिला है।
इससे पहले रायपुर में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा खंडित किए जाने के दौरान सिंधी समाज के आराध्य को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में भी अमित बघेल को जमानत मिल चुकी है। अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
अमित बघेल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता पी.बी. सुरेश और अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पैरवी की। बचाव पक्ष के अनुसार, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने जमानत याचिका पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले के अन्य आरोपी करीब सात महीने से जेल में हैं, जबकि अमित बघेल की हिरासत अवधि अपेक्षाकृत कम है। इसी आधार पर पहले हाईकोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल हिरासत की अवधि कम होना जमानत से इनकार करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए अमित बघेल को जमानत दे दी।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि राज्य सरकार ने अमित बघेल को इस मामले का ‘किंगपिन’ यानी मुख्य साजिशकर्ता बताया था और आरोप लगाया था कि पूरी घटना उनके इशारे पर हुई। लेकिन इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।
बचाव पक्ष के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और जांच से जुड़े दस्तावेज रिकॉर्ड पर उपलब्ध हैं। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
