बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल संस्थान के चेयरमैन रविशंकर महराज की याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उनके खिलाफ जारी टेलीफोन इंटरसेप्शन से जुड़े आदेशों को अवैध घोषित कर रद्द कर दिया है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि इससे सीबीआई की एफआईआर, चार्जशीट और विशेष अदालत में लंबित आपराधिक मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ट्रायल पूर्ववत जारी रहेगा।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने अपने आदेश में 28 जून 2025 को जारी टेलीफोन इंटरसेप्शन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय के 4 जुलाई 2025 के पुष्टि आदेश तथा 15 सितंबर 2025 की रिव्यू कमेटी की कार्यवाही को याचिकाकर्ता के संबंध में अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया।
कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरा इंटरसेप्शन
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय और दूरसंचार विभाग से हलफनामा मंगाकर यह जांच की कि टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 और उससे जुड़े 2024 के नियमों के तहत इंटरसेप्शन आदेश की पुष्टि तथा रिव्यू कमेटी की मंजूरी विधिसम्मत थी या नहीं। रिकॉर्ड की जांच के बाद अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता के मामले में अपनाई गई इंटरसेप्शन प्रक्रिया कानूनी मानकों पर खरी नहीं उतरती।
सीबीआई की कार्रवाई पर रोक नहीं
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें एफआईआर, चार्जशीट, समन आदेश और रायपुर की विशेष अदालत में लंबित भ्रष्टाचार के मामले को निरस्त करने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल रिकॉर्ड पर उपलब्ध अन्य वैध और ग्राह्य साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट प्रत्येक साक्ष्य की स्वीकार्यता, प्रासंगिकता और प्रमाणिकता का स्वतंत्र रूप से परीक्षण करेगा। साथ ही, यदि कोई कानूनी बाधा न हो तो निरस्त किए गए इंटरसेप्शन आदेश के आधार पर प्राप्त संदेशों की प्रतियां नष्ट करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
याचिकाकर्ता को सुनवाई में सहयोग का निर्देश
अदालत ने रविशंकर महराज को निर्देश दिया है कि वे ट्रायल कोर्ट में प्रत्येक निर्धारित तारीख पर उपस्थित रहें, सुनवाई में पूरा सहयोग करें और अनावश्यक स्थगन लेने से बचें।
यह है पूरा मामला
यह मामला 30 जून 2025 को सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के कुछ सदस्यों, बिचौलियों और निजी मेडिकल कॉलेजों के बीच कथित साजिश, रिश्वतखोरी, घोस्ट फैकल्टी, फर्जी मरीज दिखाने तथा निरीक्षण रिपोर्ट प्रभावित करने के लिए एईबीईएस (AEBAS) प्रणाली से छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं। इस मामले में रविशंकर महराज का नाम भी आरोपियों में शामिल है।
