लोरमी (ट्रू सोल्जर)। जंगल बचाने और नई हरियाली विकसित करने की दिशा में किए गए छोटे से प्रयास ने अब बड़ी उम्मीद जगाई है। खुड़िया वन परिक्षेत्र के बिजराकछार बीट में वन विभाग और ‘प्रयास अ स्मॉल स्टेप फाउंडेशन’ की संयुक्त पहल से तीन एकड़ क्षेत्र में किया गया बीजारोपण अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। यहां रोपे गए 70 प्रतिशत से अधिक बीज सफलतापूर्वक अंकुरित होकर स्वस्थ पौधों में तब्दील हो चुके हैं। कई पौधे अब एक से दो फीट तक की ऊंचाई हासिल कर चुके हैं।
यह पहल न केवल वन संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि योजनाबद्ध तरीके से किए गए सामूहिक प्रयास से वन भूमि पर नई हरियाली विकसित की जा सकती है।
15 एकड़ वन भूमि को किया गया था सुरक्षित
खुड़िया रेंज के बिजराकछार बीट में वन विभाग द्वारा करीब 15 एकड़ वन भूमि को तार फेंसिंग के माध्यम से सुरक्षित किया गया था। इसका उद्देश्य वन क्षेत्र को मवेशियों की पहुंच और अन्य संभावित खतरों से बचाना था, ताकि वहां प्राकृतिक रूप से वन विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
इसी दौरान सुरक्षित क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने की पहल को लेकर ‘प्रयास अ स्मॉल स्टेप फाउंडेशन’ की टीम ने तत्कालीन डीएफओ अभिनव कुमार से मुलाकात की। संस्था ने फेंसिंग किए गए परिसर में से तीन एकड़ भूमि पर सघन बीजारोपण की अनुमति मांगी। वन संरक्षण के प्रति संस्था की पहल को देखते हुए तत्कालीन डीएफओ ने अनुमति प्रदान की और वन विभाग की टीम को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उपचारित बीजों का वैज्ञानिक तरीके से किया गया रोपण
बीजारोपण के दौरान केवल बीज डालने तक सीमित न रहकर उनकी सुरक्षा और शुरुआती विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पौधों को शुरुआती अवस्था में होने वाली बीमारियों और कीटों से बचाने के लिए बीजारोपण से पहले बीजों का विधिवत उपचार किया गया।
इसके बाद संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से विभिन्न स्थानीय, छायादार, औषधीय और फलदार प्रजातियों के बीजों का रोपण किया। इनमें करंज, नीम, अमलतास, जाम, बेर, सिंदूर और आम जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
लगातार देखरेख और सुरक्षित वातावरण मिलने के कारण बीजों का अंकुरण बेहतर रहा। वर्तमान में अधिकांश अंकुर स्वस्थ पौधों का रूप ले चुके हैं और धीरे-धीरे अपनी जड़ें मजबूत कर रहे हैं।
‘पेड़ नहीं प्राण लगाबो’ अभियान का भी मिला सहयोग
इस अभियान को सफल बनाने में ‘पेड़ नहीं प्राण लगाबो’ अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियान की टीम द्वारा विभिन्न स्थानीय एवं दुर्लभ प्रजातियों के उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए गए। बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता ने बीजारोपण को व्यापक रूप देने में मदद की।
‘प्रयास अ स्मॉल स्टेप फाउंडेशन’ ने अभियान के संयोजक पवन जायसवाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक संस्था या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। जब सरकारी विभाग, सामाजिक संगठन और आम लोग एक उद्देश्य के लिए साथ आते हैं, तो उसके परिणाम लंबे समय तक दिखाई देते हैं।
बंजर जमीन पर जंगल तैयार करने की उम्मीद
संस्था के सदस्यों का कहना है कि बिजराकछार में बीजों का पौधों में बदलना एक उत्साहजनक संकेत है। यह पहल बताती है कि यदि किसी क्षेत्र को सुरक्षित कर वैज्ञानिक तरीके से बीजारोपण किया जाए और शुरुआती वर्षों में पौधों की नियमित देखरेख की जाए, तो ऐसी भूमि पर भी भविष्य का जंगल तैयार किया जा सकता है।
तीन एकड़ में शुरू हुआ यह प्रयास आने वाले वर्षों में एक घने हरित क्षेत्र के रूप में विकसित हो सकता है। इससे न केवल वन क्षेत्र का विस्तार होगा, बल्कि पक्षियों, वन्यजीवों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी प्राकृतिक आवास तैयार होने की संभावना बढ़ेगी।
‘प्रयास अ स्मॉल स्टेप फाउंडेशन’ का कहना है कि प्रकृति के संरक्षण में कोई भी प्रयास छोटा नहीं होता। आज बोया गया एक बीज आने वाले समय में छांव, ऑक्सीजन और जीवन का आधार बन सकता है। बिजराकछार की हरियाली इसी सोच का जीवंत उदाहरण है।
