रायपुर। देश में पहली बार E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़ी वाहन खराबी के मामले में उपभोक्ता के पक्ष में बड़ा फैसला आया है। रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (कंज्यूमर कोर्ट) ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए ग्राहक को राहत देने का आदेश जारी किया है।
आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को उसी मॉडल की नई E20 अनुकूल कार उपलब्ध कराने या वाहन की पूरी कीमत 20.5 लाख रुपये वापस करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कंपनी को आरटीओ पंजीकरण, बीमा और अन्य खर्चों की राशि लौटाने, भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने, मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये अदा करने का भी आदेश दिया गया है।
यह मामला राजधानी रायपुर के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज देबता से जुड़ा है। उन्होंने 3 जून 2024 को मारुति की एक एसयूवी खरीदी थी। करीब पांच महीने बाद 11 नवंबर 2024 को वाहन में पहली बार तकनीकी खराबी सामने आई और कार बार-बार बंद होने लगी। कंपनी ने शुरुआती जांच में इसे मिलावटी पेट्रोल का मामला बताते हुए फ्यूल टैंक की सफाई कर वाहन वापस कर दिया।
हालांकि समस्या खत्म नहीं हुई और कार को कुल पांच बार वर्कशॉप ले जाना पड़ा। दूसरी जांच में फ्यूल टैंक से सफेद जेली जैसा पदार्थ मिला। कंपनी ने माना कि पहली बार टंकी पूरी तरह साफ नहीं हुई थी और केमिकलयुक्त ईंधन अंदर रह गया था। इसके बाद दोबारा सफाई की गई, लेकिन तीसरी बार फिर टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर में सफेद परत और तरल पदार्थ मिला। चौथी बार डैशबोर्ड पर इंजन मालफंक्शन की चेतावनी आई और ईवी मोड ने काम करना बंद कर दिया। पांचवीं बार इंजन पूरी तरह ठप हो गया, जिसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा।
सुनवाई के दौरान पेट्रोल के नमूनों की जांच स्वतंत्र सरकारी मान्यता प्राप्त एसजीएस लैब में कराई गई। जांच रिपोर्ट में ईंधन में एथेनॉल की मौजूदगी की पुष्टि हुई। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल के निचले हिस्से में सफेद परत के रूप में एथेनॉल अलग होकर जमा था। जांच में ईंधन को E20 श्रेणी का पाया गया, लेकिन एथेनॉल अलग हो जाने के कारण उसकी प्रभावी मात्रा केवल 6 से 7 प्रतिशत रह गई थी।
आयोग ने अपने आदेश में माना कि संबंधित वाहन का इंजन E20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, जबकि उपभोक्ता को ऐसा वाहन बेचा गया। इसे सेवा में कमी और उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना गया।
इस मामले पर ऑटो विशेषज्ञ के. महेश कुमार का कहना है कि एथेनॉल गन्ने से तैयार किया जाता है। यदि उसमें नमी हो तो वह पेट्रोल में समान रूप से नहीं घुल पाता, क्योंकि दोनों की घनत्व (डेंसिटी) अलग होती है। इससे फ्यूल पंप और फ्यूल सिस्टम के अन्य हिस्सों पर असर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर मामले में केवल एथेनॉल को इंजन खराब होने का कारण मानना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि भारत में अभी भी कई वाहन पूरी तरह E20 ईंधन के अनुरूप विकसित नहीं हुए हैं और ईंधन में हो रहे बदलाव के साथ वाहनों को भी तकनीकी रूप से अपडेट करने की आवश्यकता है।
