रायपुर। आंखों में योग्यता की चमक, हाथों में देश की सर्वोच्च अदालतों के आदेश और सीने में प्रशासनिक बेरुखी से उपजा अथाह दर्द—यह दृश्य है छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित नवा रायपुर के तूता धरना स्थल का। वर्ष 2023 की बहुचर्चित शिक्षक भर्ती में न्याय की आस लगाए बैठे डी.एड प्रशिक्षित अभ्यर्थी बीते 24 दिसंबर से हाड़ कंपा देने वाली ठंड और मौसम की मार झेलते हुए अनवरत आमरण अनशन पर बैठे हैं। कानूनी चौखटों से लेकर जन-प्रतिनिधियों के दरवाजों तक अपनी फरियाद लेकर भटक चुके ये युवा अब सरकार की खामोशी से आजिज आकर आर-पार के संघर्ष की राह पर अग्रसर हैं।
अदालती फैसले और 1316 रिक्त पदों का गणित
पूरा विवाद 2023 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। प्राथमिक शिक्षक वर्ग में प्राथमिक योग्यता को लेकर लंबी न्यायिक जंग लड़ी गई। अभ्यर्थियों के अनुसार, उच्च न्यायालय से लेकर उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) तक विधि सम्मत लड़ाई जीतने के बाद उनके हक पर मुहर लग चुकी है। इसके बावजूद विभाग द्वारा प्रक्रिया को अंतिम अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा रहा है।
वर्तमान में करीब 1,316 पद आज भी रिक्त पड़े हैं, जिन पर इन योग्य अभ्यर्थियों की पदस्थापना होनी है। विडंबना यह है कि इस भर्ती प्रक्रिया के लिए वित्तीय आवंटन या बजट की भी कोई बाधा शेष नहीं है, फिर भी शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता इन युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
आंदोलनरत युवाओं की व्यथा यह है कि उन्होंने शासन तंत्र के हर जिम्मेदार घटक तक अपनी बात पहुंचाई है। अभ्यर्थियों के पास प्रदेश के तमाम विधायकों सहित मंत्रिमंडल के 9 कैबिनेट मंत्रियों के अनुशंसा पत्र मौजूद हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से इन रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति देने का आग्रह किया गया है। जन-प्रतिनिधियों के इन सिफारिश पत्रों के बावजूद मंत्रालय के गलियारों में फाइलें धूल फांक रही हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने ज्ञापन, मौन प्रदर्शन, सद्बुद्धि यज्ञ से लेकर हर लोकतांत्रिक मार्ग अपनाकर शासन को नींद से जगाने का जतन किया, परंतु परिणाम अब तक सिफर ही रहा।
राष्ट्रीय मंचों तक पहुंची गूंज: सत्याग्रह पोर्टल पर दस्तक
राजधानी के तूता मैदान में टूटती सांसों और गिरते स्वास्थ्य के बीच आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष को राष्ट्रीय फलक पर ले जाने की रणनीति बनाई है। प्रदेश में सुनवाई न होते देख बड़ी संख्या में पीड़ित अभ्यर्थियों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए ‘सत्याग्रह पोर्टल’ पर अपनी औपचारिक शिकायत और न्याय की गुहार दर्ज कराई है। अभ्यर्थियों का स्पष्ट संदेश है कि यदि राज्य का तंत्र मूकदर्शक बना रहा, तो वे इस आवाज को देश के हर लोकतांत्रिक पटल पर बुलंद करेंगे।
संघर्ष को धार देने रायपुर पहुंचेंगे सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दीपक
स्थानीय स्तर पर संवाद के सारे रास्ते बंद होते देख अभ्यर्थियों ने आंदोलन के दायरे को व्यापक करने का फैसला किया है। इसी क्रम में दिल्ली जाकर संपर्क साधने के बाद अब ‘काकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपक के तूता धरना स्थल पहुंचने की रूपरेखा तैयार की गई है।
आंदोलनकारियों का मानना है कि अभिजीत दीपक की उपस्थिति और उनके मुखर तेवरों से युवाओं के इस अनशन को नई ऊर्जा और राष्ट्रव्यापी ध्यानाकर्षण मिलेगा। अभ्यर्थियों का दो-टूक कहना है कि यदि शासन ने कोर्ट के आदेशों और जन-प्रतिनिधियों की अनुशंसा का सम्मान करते हुए शीघ्र नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए, तो यह शांतिपूर्ण अनशन व्यापक जन-आंदोलन का रूप लेगा, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही शासन-प्रशासन की होगी।
