मुंगेली। स्वच्छ भारत मिशन (SBM) के तहत गांव-गांव में स्वच्छता को बढ़ावा देने और गरीब परिवारों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की सरकारी कवायद के बीच मुंगेली जिले की ग्राम पंचायत करही से कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के नाम पर ग्रामीणों से ₹2 हजार की अवैध राशि वसूले जाने के आरोप ने अब तूल पकड़ लिया है। मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है, वहीं शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच का भरोसा दिलाया है।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत करही में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत व्यक्तिगत शौचालय निर्माण को लेकर ग्रामीणों से कथित तौर पर ₹2 हजार की राशि लिए जाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में खंड समन्वयक नरेंद्र यादव पर उंगली उठाई गई है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
भीम रेजिमेंट ने उठाई आवाज
मामले को गंभीरता से लेते हुए भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ ने प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। संगठन के जिला अध्यक्ष कुलदीप जांगड़े ने 06 अगस्त 2026 को जनपद पंचायत मुंगेली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शासन की जनकल्याणकारी योजना के तहत मिलने वाले व्यक्तिगत शौचालय निर्माण की राशि या सुविधा का लाभ दिलाने के नाम पर ग्रामीणों से अवैध वसूली की गई। संगठन ने मांग की है कि मामले की बारीकी से जांच कर दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
गरीबों के हक पर सवाल
स्वच्छ भारत मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना और जरूरतमंद परिवारों को शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर ग्रामीणों से अवैध राशि वसूली जाती है, तो यह न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के अधिकारों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
जिला पंचायत सीईओ ने दिए जांच के निर्देश के संकेत
मामले को लेकर जिला पंचायत सीईओ गोकुल रावटे ने कहा कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच का इंतजार है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शौचालय निर्माण के नाम पर कथित रूप से राशि वसूली गई थी या नहीं और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल करही पंचायत का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
