दुर्ग। जिले में विदेशी प्रजाति की मछलियों थाई मांगुर और बिग हेड मछली को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश के बाद जिले में इन मछलियों के बीज उत्पादन, पालन, संवर्धन, खरीद-बिक्री तथा परिवहन पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।
प्रशासन ने साफ किया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ जेल की सजा तक का प्रावधान शामिल है।
मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, ये दोनों विदेशी प्रजातियां जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। बताया गया है कि इन मछलियों को कई स्थानों पर अस्वच्छ और प्रदूषित पानी में पाला जाता है, जिससे इनके शरीर में हानिकारक और विषैले तत्व जमा होने की आशंका रहती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इनके नियमित सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और कैंसर, त्वचा रोग, पेट संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
पर्यावरणीय दृष्टि से भी ये मछलियां स्थानीय प्रजातियों के लिए नुकसानदेह मानी जा रही हैं। तेजी से प्रजनन और अधिक भोजन ग्रहण करने की क्षमता के कारण ये जलाशयों में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डालती हैं, जिससे देशी मछलियों की प्रजातियां प्रभावित हो रही हैं।
प्रतिबंध को सख्ती से लागू कराने के लिए मत्स्य पालन विभाग ने विशेष उड़नदस्ता टीम का गठन किया है। यह टीम नियमित रूप से मछली बाजारों, तालाबों और परिवहन वाहनों की जांच करेगी। जहां भी प्रतिबंधित मछलियों का भंडारण या बिक्री पाए जाने पर तुरंत जब्ती की कार्रवाई की जाएगी और नष्ट करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस प्रतिबंध का पालन करें और जलीय पर्यावरण तथा जनस्वास्थ्य की सुरक्षा में सहयोग दें।
