बिलासपुर। जिले के रतनपुर के ऐतिहासिक बिकमा तालाब में आज सुबह लोगों ने मगरमच्छ के अंडे से बच्चे निकलते देखे। वार्ड पार्षद की पहल पर इन छह बच्चों को सुरक्षित वन विभाग को सौंप दिया गया, जिन्होंने बाद में इन्हें खूंटाघाट बांध में छोड़ा। सुबह बिकमा तालाब में स्नान के लिए पहुंचे लोगों ने यह दुर्लभ नजारा देखा। उन्होंने तुरंत मगरमच्छ के बच्चों को एक टब में सुरक्षित रखा और पुलिस व वन विभाग को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।
स्थानीय नागरिकों की सहायता से मगरमच्छ के सभी छह बच्चों को सुरक्षित खूंटाघाट बांध में छोड़ दिया गया। वार्ड पार्षद मनोज पाटले ने बताया कि बिकमा तालाब में वर्तमान में तीन मगरमच्छ हैं, जिनकी निगरानी वन विभाग के कर्मचारी करते हैं। उन्होंने ही मगरमच्छ के बच्चों को बांध तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। रतनपुर का बिकमा तालाब 250 वर्ष से अधिक पुराना है। इसका निर्माण छत्तीसगढ़ में प्रथम स्वतंत्र और प्रत्यक्ष शासन स्थापित करने वाले मराठा शासक विंबाजी राव भोसले ने करवाया था।
तालाब से भगवान राम की प्रतिमा मिलने की मान्यता
स्थानीय लोगों में यह मान्यता प्रचलित है कि तालाब की खुदाई के दौरान भगवान राम की एक प्रतिमा मिली थी। यह प्रतिमा वर्तमान में रामटेकरी स्थित श्रीराम मंदिर में स्थापित है। रतनपुर निवासी अजय गुप्ता के अनुसार, यह प्रतिमा सालिगराम पत्थर की बनी है और इसमें भगवान श्रीरामचंद्रजी को अजानुबाहू (लंबे हाथों वाले) के रूप में दर्शाया गया है।
पुरातत्ववेत्ता ने दी संतुलित प्रतिक्रिया
पुरातत्ववेत्ता राहुल सिंह ने बताया कि तालाब प्राचीन है, लेकिन रामटेकरी मंदिर की प्रतिमा मिलने की मान्यता के संबंध में उनके पास कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं है। हालांकि, वे इस मान्यता का खंडन भी नहीं करते, क्योंकि यह लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है।
