कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी को एक और राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी है। हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे की वजह फिलहाल सामने नहीं आई है।
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब टीएमसी पहले से ही अंदरूनी असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाओं का सामना कर रही है। पार्टी में उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय और प्रभावशाली नेता के रूप में रही है।
गौरतलब है कि सुष्मिता देव, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं। असम के सिलचर की रहने वाली सुष्मिता देव वर्ष 2014 में कांग्रेस के टिकट पर सिलचर लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। कांग्रेस ने उन्हें महिला कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया था। बाद में वर्ष 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थाम लिया था।
सुखेंदु शेखर के बाद सुष्मिता देव दूसरी टीएमसी सांसद हैं, जिन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया है।
इसी बीच, टीएमसी में संगठनात्मक असंतोष की खबरें भी सामने आ रही हैं। दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग गुट बनाकर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है। बागी सांसदों ने काकोली घोष को अपना मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) चुना है।
बताया जा रहा है कि इस गुट में काकोली घोष के अलावा शताब्दी रॉय, बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, जून मालिया, दीपक अधिकारी (देव), कालीपदा सरेन, जगदीश बसुनिया, असित मल, अबू ताहिर खान, खलीकुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक समेत कई सांसद शामिल हैं।
टीएमसी की ओर से इन घटनाक्रमों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, सुष्मिता देव के इस्तीफे और पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति को राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
