कवर्धा। जनपद पंचायत बोड़ला अंतर्गत बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत लूप में निर्माणाधीन पंचायत भवन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। भवन का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ है, जबकि निर्माणाधीन भवन की दीवारों में जगह-जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं। इसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता बढ़ती जा रही है।
बताया गया कि पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर के कार्यकाल में वनवासियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत लूप में पंचायत भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि भवन बनने के बाद पंचायत के कामकाज के साथ स्थानीय लोगों को भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन निर्माण की धीमी गति और कथित घटिया गुणवत्ता ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
फ्लाई ऐश ईंट की जगह जंगल की लकड़ी से पकाई ईंट लगाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित फ्लाई ऐश ईंट के स्थान पर जंगल की लकड़ी से पकाई गई ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भवन में इस्तेमाल की गई ईंटों और अन्य निर्माण सामग्री के नमूने लेकर उनकी तकनीकी जांच कराई जाए। जांच में यदि अनियमितता सामने आती है तो संबंधित निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग की गई है।
दरारों पर लीपापोती से उठे सवाल
निर्माणाधीन भवन में दरारें सामने आने के बाद ग्रामीणों का कहना है कि उनकी तकनीकी जांच कराने के बजाय दरारों को ढकने के लिए लीपापोती की जा रही है। इससे ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि भवन की वास्तविक मजबूती और निर्माण गुणवत्ता की जांच कराने के बजाय दरारों को छिपाने की कोशिश क्यों की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन सार्वजनिक उपयोग का भवन है। यदि निर्माण के दौरान गुणवत्ता से समझौता हुआ है तो भविष्य में भवन की सुरक्षा और उपयोगिता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में निर्माण पूरा होने से पहले ही विशेषज्ञों से भवन की जांच कराया जाना जरूरी है।
सूचना पटल गायब, पारदर्शिता पर भी सवाल
निर्माण स्थल से सूचना पटल गायब होने की बात भी सामने आ रही है। निर्माण कार्य की स्वीकृत राशि, निर्माण एजेंसी, कार्य प्रारंभ होने की तिथि और निर्धारित पूर्णता अवधि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन निर्माण से संबंधित सभी जानकारी निर्माण स्थल पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जानी चाहिए, ताकि आम लोगों को कार्य की लागत और समयसीमा की जानकारी मिल सके।
उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीणों ने पंचायत भवन के निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भवन में इस्तेमाल ईंट, सीमेंट, रेत और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच के साथ निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता का भी परीक्षण कराया जाए।
