नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने भारत-नेपाल सीमा पर दैनिक उपयोग के सामानों पर लगाए गए कस्टम शुल्क (भंसार) को लेकर बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने फिलहाल 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी वसूली पर रोक लगा दी है। यह आदेश मामले की अंतिम सुनवाई और निर्णय होने तक प्रभावी रहेगा।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हरिप्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर इस प्रकार की सख्ती आम नागरिकों के लिए अनावश्यक परेशानी पैदा कर रही है।
दरअसल, नेपाल सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए नियम के तहत भारत से नेपाल ले जाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर भी कस्टम शुल्क वसूला जा रहा था। इस नियम के लागू होने के बाद सीमा क्षेत्रों में रहने वाले आम लोगों और छोटे व्यापारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
सीमा चौकियों पर चिप्स, बिस्कुट, केले और अन्य रोजमर्रा की छोटी वस्तुओं पर भी जांच और शुल्क वसूली को लेकर विवाद की स्थिति बनने लगी थी। कई स्थानों पर आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक की घटनाएं भी सामने आई थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि जब तक इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक अर्थ मंत्रालय और कस्टम विभाग दैनिक उपयोग के सामानों पर आम लोगों से कोई टैक्स नहीं वसूलेंगे।
इस फैसले के बाद सीमा क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों और आम लोगों की आवाजाही में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। छोटे व्यापारियों का कहना है कि अदालत के इस आदेश से सीमा पर अनावश्यक विवाद और परेशानियां कम होंगी।
बताया जा रहा है कि सरकार के इस फैसले के खिलाफ अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग्य सिंह और बिक्रम शाह ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया।
