रायपुर। रायपुर नगर निगम में सड़क निर्माण को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। शहीद हवलदार अब्दुल हमीद वार्ड के कांग्रेस पार्षद शेख मुशीर ने सड़क निर्माण की स्वीकृति नहीं मिलने से नाराज़ होकर नगर निगम मुख्यालय में गांधी प्रतिमा के नीचे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। उनका साफ ऐलान है कि जब तक मौदहापारा के मुख्य मार्ग के डामरीकरण के लिए 11 लाख रुपये की राशि स्वीकृत नहीं होती, तब तक वे हर दिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक धरने पर बैठे रहेंगे।
धरने पर बैठे पार्षद शेख मुशीर ने कहा कि वे पिछले 11 महीनों से निगम के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। सड़क की हालत बद से बदतर हो चुकी है, गड्ढों के कारण आए-दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक पार्षद या एक सड़क की नहीं, बल्कि वार्ड के हजारों नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ी है। खराब सड़क के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। अगर समय रहते सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
धरने को समर्थन देने पहुंचे नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, सिर्फ 11 लाख रुपये की मंजूरी के लिए एक जनप्रतिनिधि को 11 महीनों तक भटकाया जा रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि रायपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली कितनी लचर हो चुकी है। अगर इतनी छोटी राशि भी स्वीकृत नहीं हो पा रही, तो शहर के बड़े विकास कार्यों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में जानबूझकर देरी की जा रही है और जनसमस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही सड़क निर्माण को मंजूरी नहीं दी गई, तो कांग्रेस पार्षद और जनप्रतिनिधि मिलकर आंदोलन को और तेज करेंगे।
नगर निगम मुख्यालय में चल रहे इस धरने ने अब शहर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर पार्षद सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है। अब देखना होगा कि जनता की आवाज़ और जनप्रतिनिधि के आंदोलन के दबाव में निगम प्रशासन कब तक फैसला लेता है।
