कुवैत। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच ईरान ने कुवैत, इराक और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए हैं। वहीं अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के केशम द्वीप स्थित एक संचार टावर पर हमला किया है। ताजा घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
सबसे बड़ा हमला कुवैत में देखने को मिला, जहां ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया। जानकारी के अनुसार एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई और परिसर में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमले के बाद टर्मिनल का एक हिस्सा आग के गोले में तब्दील हो गया।
हमले में कई लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों को तत्काल अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। एयरपोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। साथ ही पूरे एयरपोर्ट पर आपातकालीन प्रबंधन योजना लागू कर दी गई है।
कुवैत की पब्लिक अथॉरिटी फॉर सिविल एविएशन (PACA) ने बताया कि हमले के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं तथा सुरक्षा एजेंसियां क्षति का आकलन कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार एयरपोर्ट की इमारत और अन्य सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।
इस बीच कुवैत रक्षा मंत्रालय ने भी हमले की पुष्टि की है। मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने ईरान की कार्रवाई को “आपराधिक आक्रामकता” बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हमले में एयरपोर्ट परिसर को गंभीर नुकसान पहुंचा है, हालांकि सुरक्षा बल और आपातकालीन सेवाएं स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
हमले के बाद पूरे कुवैत में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। जगह-जगह चेतावनी सायरन बजाए जा रहे हैं और नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की गई है। कुवैत सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एडवाइजरी में कहा है कि यदि किसी क्षेत्र में मिसाइल, ड्रोन या उनके अवशेष दिखाई दें तो लोग उनसे दूर रहें और तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। सेना का कहना है कि ऐसे मलबे में विस्फोटक सामग्री हो सकती है, जिससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
दूसरी ओर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय, एयरबेस और सैन्य हेलीकॉप्टरों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार यह कार्रवाई फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और केशम द्वीप के आसपास अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई।
हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान द्वारा दागी गई अधिकांश मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रहीं या उन्हें रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया। CENTCOM ने दावा किया कि बहरीन की ओर दागी गई तीन मिसाइलों को भी सफलतापूर्वक मार गिराया गया और अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सेना पूरी तरह सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार है। साथ ही उसने ईरान पर क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालने का आरोप लगाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच जारी सैन्य टकराव और अधिक बढ़ता है तो इसका असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं, जहां हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
