रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से खनन क्षेत्र के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में किए गए परीक्षण के दौरान जेम-क्वालिटी हीरों की प्राप्ति हुई है। इस खोज ने प्रदेश में बड़े हीरा भंडार मिलने की उम्मीदों को नई मजबूती दी है।
200 टन नमूने से मिले 5 हीरे
NMDC-CMDC लिमिटेड द्वारा किए गए परीक्षण में बलौदा बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक से प्राप्त 200 टन नमूना सामग्री की प्रोसेसिंग की गई। इस प्रक्रिया के दौरान कुल 1.22 कैरेट वजन के 5 हीरे बरामद हुए हैं। इनमें 2 जेम-क्वालिटी हीरे शामिल हैं, जिन्हें उच्च गुणवत्ता का माना जाता है।
22 जून को हुई आधिकारिक पुष्टि
कंपनी ने 22 जून को इस खोज की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से वैज्ञानिक अध्ययन और सर्वेक्षण किए जा रहे थे। शुरुआती परिणामों ने विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। कंपनी के अनुसार क्षेत्र में प्रारंभिक भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, जियोफिजिकल अध्ययन और लगभग 500 मीटर की ड्रिलिंग की गई थी। इन अध्ययनों के आधार पर इस इलाके को संभावित हीरा क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया था। अब हीरों की प्राप्ति ने इन आकलनों को और मजबूत किया है।
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छत्तीसगढ़ बन सकता है नया डायमंड हब
खनन विशेषज्ञों का मानना है कि खोज के शुरुआती चरण में ही जेम-क्वालिटी हीरों का मिलना बेहद सकारात्मक संकेत है। दुनिया के कई प्रमुख हीरा उत्पादक क्षेत्रों की पहचान भी प्रारंभिक स्तर पर इसी तरह की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण खोजों से हुई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि आगे की खोज और परीक्षण में बड़े भंडार की पुष्टि होती है, तो छत्तीसगढ़ देश का नया डायमंड हब बन सकता है। इससे राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
देश के लिए भी रणनीतिक महत्व
भारत वर्तमान में कच्चे हीरों की आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में देश के भीतर संभावित हीरा भंडार की खोज न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
