सुकमा। बस्तर तिरंगा यात्रा के दूसरे दिन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एर्राबोर पहुंचे और नक्सल हिंसा में शहीद हुए 33 जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पुनर्वासित महिलाओं ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और सांसद महेश कश्यप को राखी बांधकर विश्वास, सुरक्षा और नए बस्तर की उम्मीदों का रक्षा सूत्र सौंपा। महिलाओं ने पुलिस जवानों को भी राखियां भेंट कीं।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि “आज कट्टम ज्योति जीत गई और नक्सली हार गए।” उन्होंने कहा कि मासूम कट्टम ज्योति की नक्सलियों ने नृशंस हत्या की थी, लेकिन आज उसी बस्तर की धरती पर नक्सलवाद के सफाए का संकल्प साकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि बंदूक के बल पर लोगों को डराना और निर्दोषों की हत्या करना लोकतंत्र नहीं है। बस्तर के समाज, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों ने लोकतंत्र की ताकत दिखाते हुए नक्सलवाद को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा जिन क्षेत्रों से गुजर रही है, वे नक्सली हिंसा की दर्दनाक घटनाओं के साक्षी रहे हैं। श्यामगिरी, दोरनापाल, मनिकोंटा, बुर्कापाल और ताड़मेटला जैसे स्थानों पर शहीद हुए जवानों और ग्रामीणों की कुर्बानी को यात्रा नमन कर रही है। शहीदों की स्मृति में विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण किया गया तथा पवित्र मिट्टी का संग्रहण भी किया गया।
कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वे इसी बस्तर की माटी में पैदा हुए हैं और उन्होंने स्वयं नक्सलवाद का दंश झेला है। उन्होंने बताया कि उनके भाई की भी नक्सलियों ने हत्या की थी। उन्होंने कहा कि आज शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए ऐसा महसूस होता है कि वे अपने परिवार के दुख बांट रहे हैं। बस्तर में नक्सलवाद का खात्मा उनके लिए निजी खुशी और सफलता का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर का विकास उनके लिए अपने परिवार के विकास जैसा है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ बस्तर भी विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। अब बस्तर का विकास यहां के लोगों की आवश्यकताओं, आकांक्षाओं और सहभागिता के अनुरूप किया जाएगा। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर घर तिरंगा लगाने की अपील भी की।
सांसद महेश कश्यप ने कहा कि तिरंगे का संदेश लेकर सुकमा में लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा करना ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा में 2100 से अधिक निर्दोष लोगों की जान गई है। शासन के संकल्प, सुरक्षा बलों की वीरता और बस्तरवासियों के सहयोग से अब नक्सलवाद का अंत हुआ है।
