मुंगेली। न्यायधानी के आंचल में बसे मुंगेली जिले में अन्नदाता के पसीने की कमाई पर भ्रष्टाचार के घुन ने ऐसी सेंध लगाई है कि समूचा प्रशासनिक अमला सख्ते में है। सरकारी आकड़ों और धरातल की हकीकत के बीच गहरे होते फासले अब चीख-चीख कर एक बड़े संगठित घोटाले की तस्दीक कर रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो धान उठाव के बाद विभिन्न केंद्रों से हजारों क्विंटल धान रहस्यात्मक ढंग से गायब हो गया है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये के आसपास आंकी जा रही है,जो कि प्रशासन के नजर पर केवल उठाव में शेष नहीं बल्कि गबन के नजरिए से भी देखा जा रहा है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूर्व में हुई दंडात्मक कार्रवाइयों के बावजूद भ्रष्टाचार का यह खेल खुलेआम प्रशासनिक संरक्षण के साये में फलता-फुल रहा है।
घोटाले की इस काली पटकथा का केंद्र मुख्य रूप से हथनीकला खरीदी केंद्र को माना जा रहा है,जहाँ उठाव के पश्चात सूत्रों के अनुसार करीब 979 टन धान उठाव शेष पाया गया है, जिसकी कीमत लगभग 2 करोड़ 80 लाख रुपये है, जबकि सूत्रों के अनुसार केंद्र में उठाव के लिए इतनी बड़ी मात्रा में धान उपलब्ध ही नहीं है जिससे गबन का संदेह की पुष्टि स्वत: हो जाती है। भ्रष्टाचार की यह जड़ें यहीं नहीं रुकीं; सूत्रों के अनुसार धरदेई में 215 टन, नवागांव में 124 टन, धपई में 101 टन, छटन केंद्र में 84 टन,ककेड़ी 68 टन,फुल्झर 258 टन , खुड़िया 904 टन,डोंगरिया 28 टन तथा अन्य केंद्रों में भी धान की भारी कमी व शेष उठाव ने व्यवस्था के दावों को खोखला साबित कर दिया है, हालांकि आंकड़े जांच के बाद कम ज्यादा हो सकते इसलिए इसकी पुष्टि ट्रू सोल्जर नहीं करता है। सवाल यह उठता है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर सरकारी संपत्ति का गबन जिला प्रशासन की नाक के नीचे बिना किसी उच्च पदस्थ अधिकारी की मौन सहमति या ‘संरक्षण’ के संभव है?
सूत्रों का गंभीर आरोप है कि इस सुनियोजित गबन के सूत्रधार धान ऊठाव की जिम्मेदारी वाले विभाग के आला अधिकारी और निरीक्षक हैं। यह संशय इसलिए भी गहराता है क्योंकि कुछ माह पूर्व जब राइस मिलर्स और प्रबंधकों पर एफआईआर की गाज गिरी और खाद्य अधिकारी को निलंबित किया गया,तब संबंधित अन्य विभागों के अधिकारियों पर न तो कार्रवाई हुई और जिला नोडल अधिकारी जैसे रसूखदार पदों पर बैठे लोगों को नोटिस तक जारी नहीं किया गया। महज तीन महीनों के भीतर दोबारा इतने बड़े घोटाले का पुनरावृत्ति होना इस ओर इशारा करता है कि पिछली कार्रवाई केवल प्यादों पर हुई थी, जबकि शतरंज के असली खिलाड़ी आज भी व्यवस्था को अपनी उंगलियों पर नचा रहे हैं।
वर्तमान में कलेक्ट्रेट गलियारों से लेकर जिले के चौक-चौराहों तक इसी बात की चर्चा है कि क्या इस बार कानून का हाथ उन सफेदपोशों तक पहुँचेगा जो विभाग की आड़ में भ्रष्टाचार की फसल काट रहे हैं? क्या व्यवस्था एक बार फिर छोटी मछलियों को फंसाकर मगरमच्छों को अभयदान देगी, या इस बार वास्तव में न्याय का तराजू संतुलित रहेगा?
कलेक्टर ने कहा- इस संवेदनशील और गंभीर मामले पर अपनी सख्त प्रतिक्रिया देते हुए मुंगेली कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन किसी भी सूरत में अनैतिक कृत्यों को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “सरकार और जिला प्रशासन भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर अडिग है। धान के स्टॉक में कमी का मामला हमारे संज्ञान में आया है और इसकी सूक्ष्मता से जांच के निर्देश दिए गए हैं। नियम विरुद्ध कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
कलेक्टर के इस कड़े रुख ने जहां भ्रष्ट अधिकारियों की नींद उड़ा दी है, वहीं जिले की जनता में एक आस जगाई है कि शायद इस बार ‘मिलीभगत की बेल’ पर ‘कानून की जेल’ भारी पड़ेगी। अब देखना यह है कि जांच की आंच संबंधित विभाग के बंद कमरों तक कब पहुँचती है।
खबर लिखे जाने के पुर्व सहकारीता आयुक्त मुंगेली हितेश कुमार श्रीवास ने ट्रू सोल्जर जिला ब्यूरो चीफ को फोन कर अपना पक्ष रखा जिसमें उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है यदि उनका या विभाग के किसी भी कर्मचारी अधिकारी का नाम सामने आता है तो उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए व दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाना चाहिए,हम जांच व कार्रवाई के लिए हमेशा तैयार हैं।
