गुरूर/बालोद। बालोद जिले के गुरूर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बासीन में निर्माणाधीन वाल (दीवार) कार्य को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी मानकों की अनदेखी, बिजली के अवैध उपयोग तथा प्रशासनिक निगरानी के अभाव जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर गांव में चर्चा का माहौल है और ग्रामीण जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वाल निर्माण कार्य में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के लिए साफ पानी के स्थान पर गंदे और दूषित पानी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य इसी प्रकार जारी रहा तो भविष्य में दीवार की स्थायित्व क्षमता प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण स्थल पर बिजली उपयोग को लेकर भी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका दावा है कि कार्य के लिए वैध विद्युत व्यवस्था के बजाय सीधे लाइन से बिजली का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन ग्रामीणों ने इसकी जांच कराने की मांग की है।
ठेकेदार पर मनमानी का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार जब उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए तो ठेकेदार ने उनकी आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने अपने प्रभाव और उच्च स्तर तक पहुंच होने की बात कहते हुए शिकायतों को महत्व न देने का रवैया अपनाया। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, लेकिन बासीन में चल रहे कार्य में इन पहलुओं की कमी दिखाई दे रही है।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा प्रश्न निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कार्यस्थल पर न तो किसी तकनीकी अधिकारी की नियमित मौजूदगी दिखाई देती है और न ही गुणवत्ता परीक्षण की कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर आती है। लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किए जाने से ठेकेदार को मनमानी करने का अवसर मिल रहा है।
रोजगार और मजबूरी के बीच ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कई लोग निर्माण कार्य में मजदूरी कर रहे हैं। ऐसे में रोजगार प्रभावित होने की आशंका के कारण वे खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि कई ग्रामीणों का मानना है कि अल्पकालिक लाभ के लिए घटिया निर्माण को नजरअंदाज करना गांव के भविष्य के साथ समझौता होगा।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत तथा संबंधित विभागों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए, उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो तथा यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है, लेकिन यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और नियमों की अनदेखी होगी तो सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों की शिकायतों का किस प्रकार संज्ञान लेता है।
