रायपुर। सावन का तीसरा सोमवार इस बार श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक संयोग लेकर आ रहा है. सोमवार को ही नागपंचमी होने से शिवभक्त एक साथ भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और नाग देवता का पूजन करेंगे. पुजारियों के अनुसार करीब 23 साल बाद सावन सोमवार और नागपंचमी का ऐसा संयोग बन रहा है। इसे लेकर शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मंदिरों को फूलों, रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया जा रहा है।
धार्मिक मान्यता
सावन में सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा और शिव आराधना का संयोग होने से भक्त इसे विशेष पुण्यकारी अवसर के रूप में देख – रहे हैं. श्रद्धालु व्रत, संयम, शिव मंत्र जाप, अभिषेक और दान-पुण्य के माध्यम से – भगवान शिव की आराधना करेंगे.
मंदिरों में विशेष सजावट सुबह से होगा अभिषेक
सावन सोमवार और नागपंचमी के संयोग को देखते हुए देशभर के शिवालयों में विशेष तैयारियां की गई हैं. मंदिर परिसरों की साफ-सफाई के साथ फूलों की सजावट, विद्युत रोशनी और पूजा व्यवस्था को व्यवस्थित किया जा रहा है. कई मंदिरों में सुबह से ही विशेष अभिषेक और पूजन कार्यक्रम होंगे. शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. मंदिर समितियों की ओर से दर्शन और जलाभिषेक की व्यवस्था को लेकर तैयारियां की गई हैं. श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र अर्पित करेंगे और इसके बाद नागपंचमी के अवसर पर नाग देवता की पूजा-अर्चना करेंगे.
शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक
सावन सोमवार को भगवान शिव के अभिषेक का विशेष महत्व माना गया है. श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद शिव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव को जल अर्पित करेंगे. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करने की धार्मिक परंपरा है. कई श्रद्धालु गंगाजल और पवित्र नदियों के जल से भी शिवलिंग का अभिषेक करेंगे. पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र, आक-धतूरा, सफेद फूल और फल अर्पित किए जाएंगे. धार्मिक मान्यता के अनुसार बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. तीन पत्तियों वाले बेलपत्र को शिवलिंग पर अर्पित करते समय श्रद्धालु भगवान शिव का ध्यान करते हैं और महामृत्युंजय मंत्र अथवा ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हैं.
नागपंचमी पर बढ़ जाएगा शिव आराधना का महत्व
सोमवार को नागपंचमी होने से इस बार शिव आराधना का महत्व और बढ़ गया है. भगवान शिव के गले में नाग देवता के विराजमान होने के कारण नागपंचमी के दिन शिव और नाग देवता की संयुक्त आराधना की धार्मिक परंपरा है. पुजारियों के अनुसार नाग देवता की पूजा में हल्दी, अक्षत, फूल और दूध अर्पित करने की परंपरा है. हालांकि वास्तविक सांपों को दूध पिलाने के बजाय प्रतीकात्मक रूप से नाग देवता की प्रतिमा या चित्र का पूजन करना उचित माना जाता है. है. पूजा के दौरान नाग देवता से परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना की जाएगी.
