मुंगेली। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अधिकारों, सामाजिक न्याय और किसानों के हितों को लेकर ओबीसी महासभा छत्तीसगढ़ की मुंगेली इकाई ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। महासभा के प्रदेश पदाधिकारियों के निर्देश पर मुंगेली में गणेश यादव के नेतृत्व में यह ज्ञापन तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के माध्यम से प्रेषित किया गया।
ज्ञापन में ओबीसी वर्ग के लिए शिक्षा, रोजगार और आर्थिक क्षेत्रों में समान अवसर तथा आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी मांगें रखी गई हैं। महासभा ने देशभर में ‘वन नेशन-वन रिजर्वेशन’ व्यवस्था लागू करने की मांग करते हुए कहा कि ओबीसी समाज की बड़ी आबादी होने के बावजूद उन्हें अपेक्षित अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं।
संगठन ने मांग की है कि देशभर में शिक्षा, सरकारी नौकरियों, न्यायपालिका और निजी क्षेत्रों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए तथा इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाए। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में लंबे समय से लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को अध्यादेश या विधानसभा के माध्यम से तत्काल लागू करने और आगामी जनगणना में ओबीसी वर्ग की पृथक जातिगत गणना कराने की मांग भी की गई है।
ज्ञापन में ओबीसी किसानों के हितों को लेकर भी कई मांगें रखी गईं। महासभा ने ‘ओबीसी कृषि भूमि संरक्षण अधिनियम’ बनाने, आदिवासी समाज की तर्ज पर ओबीसी वर्ग की कृषि भूमि को गैर-ओबीसी को बेचने के लिए कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य करने तथा भूमि संबंधी धोखाधड़ी रोकने के लिए राजस्व संहिता में संशोधन की मांग की है।
इसके अलावा पिछले 20 वर्षों में ओबीसी किसानों की संदिग्ध भूमि बिक्री की तहसील स्तर पर जांच कराने का आग्रह भी शासन से किया गया है।
ओबीसी महासभा ने कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर इन मांगों पर शासन द्वारा सकारात्मक और न्यायसंगत कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
