स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताज़ा रिपोर्ट ने वैश्विक परमाणु हथियारों को लेकर एक बार फिर गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के प्रमुख परमाणु शक्तियां अपने हथियार भंडार को या तो आधुनिक बना रही हैं या धीरे-धीरे उसका विस्तार कर रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संतुलन पर नए सवाल खड़े हो रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर हल्की गिरावट, लेकिन खतरा बरकरार
SIPRI के मुताबिक जनवरी 2026 तक दुनिया में कुल परमाणु हथियारों की संख्या लगभग 12,187 वॉरहेड्स रह गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में मामूली कमी दर्शाती है। हालांकि यह गिरावट राहत देने वाली लग सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कई देशों द्वारा चल रहा आधुनिकीकरण भविष्य में तनाव बढ़ा सकता है।
अमेरिका और रूस अब भी सबसे आगे
रिपोर्ट के अनुसार परमाणु शक्ति के मामले में रूस और अमेरिका अभी भी शीर्ष पर बने हुए हैं— रूस: लगभग 5,420 वॉरहेड्स, अमेरिका: लगभग 5,042 वॉरहेड्स
हालांकि दोनों देश अपने पुराने भंडार को कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, लेकिन वे अभी भी दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का बड़ा हिस्सा रखते हैं।
चीन का तेज विस्तार
चीन अपने परमाणु भंडार को तेजी से बढ़ा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि उसके वॉरहेड्स की संख्या लगभग 600 से बढ़कर 620 हो गई है। SIPRI का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और तेजी से बढ़ सकती है, हालांकि 2030 तक भी चीन अमेरिका और रूस की तुलना में काफी पीछे रहेगा।
भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति
दक्षिण एशिया में भी परमाणु संतुलन लगातार चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार— भारत: लगभग 190 वॉरहेड्स (पहले लगभग 180), पाकिस्तान: लगभग 170 वॉरहेड्स (कोई बड़ा बदलाव नहीं)
इससे भारत ने पाकिस्तान पर अपनी बढ़त बनाए रखी है। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि भारत अपनी परमाणु क्षमता को धीरे-धीरे आधुनिक और अधिक तैयार स्थिति (operational readiness) की ओर ले जा रहा है।
अन्य देशों की स्थिति
- फ्रांस: लगभग 370 वॉरहेड्स (तेज वृद्धि)
- ब्रिटेन: लगभग 225 वॉरहेड्स (स्थिर स्थिति)
- इज़राइल: लगभग 90 वॉरहेड्स (कोई बदलाव नहीं)
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उत्तर कोरिया: लगभग 60 वॉरहेड्स (वृद्धि दर्ज)
