कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी में बगावत और टूट का दौर तेज हो गया है। टीएमसी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी की लोकसभा सांसद काकोली घोष ने अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके कुछ ही घंटों बाद राज्य की विभिन्न नगरपालिकाओं से टीएमसी के 101 पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नगरपालिकाओं में इस्तीफों की यह अब तक की सबसे बड़ी घटना मानी जा रही है। लगातार हो रहे इस्तीफों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि पार्टी के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ रहा है और जमीनी स्तर पर संगठन कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।
जानकारी के मुताबिक, जिन नगरपालिकाओं से पार्षदों ने इस्तीफा दिया है उनमें उत्तर बैरकपुर से 15, गारुलिया से 18, कोंटाई से 14, हालिसहार से 16, भाटपारा से 30 और डायमंड हार्बर से 8 पार्षद शामिल हैं। खास बात यह है कि डायमंड हार्बर को टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी सांसद हैं। ऐसे क्षेत्र से पार्षदों का इस्तीफा पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
विधानसभा चुनाव में हार के बाद से टीएमसी लगातार अंदरूनी कलह, दलबदल और असंतोष से जूझ रही है। पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता खुलकर नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी का स्थानीय संगठन तेजी से कमजोर हो रहा है, जिसका असर नगरपालिकाओं और बूथ स्तर तक दिखाई देने लगा है।
गौरतलब है कि साल 2011 में ममता बनर्जी ने 35 वर्षों के वाम शासन का अंत कर पश्चिम बंगाल की सत्ता पर कब्जा किया था। इसके बाद लगातार 15 वर्षों तक टीएमसी राज्य की सत्ता में बनी रही। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनी। इस हार के बाद से पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
कुछ दिन पहले ही ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं के साथ बैठक में स्पष्ट कहा था कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे पार्टी छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें किसी के जाने की चिंता नहीं है और वे अपने दम पर पार्टी को फिर से खड़ा करेंगी। हालांकि अब लगातार हो रहे इस्तीफे पार्टी नेतृत्व के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि जल्द ही पार्टी संगठन को मजबूत करने और नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश नहीं की गई, तो आने वाले समय में टीएमसी को और बड़े राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को टूटने से बचाना और कार्यकर्ताओं का विश्वास बनाए रखना है।
