नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दवा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए एक अहम निर्णय लिया है। नए नियमों के तहत अब कफ सिरप बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के मेडिकल स्टोर से नहीं खरीदे जा सकेंगे। सरकार ने कफ सिरप को उन दवाओं की सूची (अनुसूची-K) से हटा दिया है, जिनकी बिक्री पर पहले कुछ छूट दी गई थी।
यह संशोधन ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 12 और 33 के तहत किया गया है, और इसके लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव किए गए हैं। इस फैसले के बाद कफ सिरप की बिक्री, निर्माण और वितरण पर अब पहले से कहीं अधिक सख्त नियंत्रण लागू होगा।
दवा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कफ सिरप जैसे तरल औषधियों में कई रासायनिक तत्व और फ्लेवरिंग एजेंट शामिल होते हैं, जिनकी निर्माण प्रक्रिया में छोटी सी भी लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। इसलिए अब इनकी बिक्री पर डॉक्टर की सलाह अनिवार्य कर दी गई है।
दर्दनाक घटनाओं के बाद सख्ती
यह कदम हाल ही में हुई कुछ गंभीर घटनाओं के बाद उठाया गया है। अक्टूबर 2025 में मध्य प्रदेश में कथित तौर पर दूषित कफ सिरप के सेवन से 26 बच्चों की मौत का मामला सामने आया था, जिसने दवा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
इसके अलावा 2022-23 में भी भारतीय कफ सिरप को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे थे, जिसके बाद कई देशों में बच्चों की मौत के मामलों से जुड़ी रिपोर्टों ने भारत में दवा गुणवत्ता नियंत्रण को और सख्त करने की आवश्यकता को उजागर किया था।
सरकार के पहले के कदम
दवा गुणवत्ता को सुधारने के लिए केंद्र सरकार पहले भी कई महत्वपूर्ण कदम उठा चुकी है, जिनमें शामिल हैं—
- कफ सिरप के निर्यात से पहले सरकारी लैब में अनिवार्य गुणवत्ता परीक्षण
- दवा निर्माण इकाइयों के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) मानकों को सख्त करना
- नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई और लाइसेंस निलंबन
- केंद्र और राज्य स्तर पर संयुक्त निरीक्षण अभियान को तेज करना
-
2023-24 के दौरान इन उपायों के बाद दवा उद्योग की निगरानी प्रणाली और मजबूत की गई है।
