धरसींवा। औद्योगिक क्षेत्र उरला के ग्राम कनहेरा स्थित सागर टीएमटी प्लांट में फर्नेस ब्लास्ट की घटना ने औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना में एक मजदूर के घायल होने की जानकारी सामने आई है, जिसका निजी अस्पताल में उपचार जारी है। आरोप है कि हादसे के बाद घटना की सूचना तत्काल पुलिस और संबंधित विभागों को देने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
बताया जा रहा है कि फर्नेस में ब्लास्ट के बाद घायल मजदूर को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, घटना की आधिकारिक सूचना पुलिस को नहीं दी गई। बाद में बाहरी माध्यम से हादसे की जानकारी मिलने पर उरला पुलिस अस्पताल पहुंची और घायल के बयान दर्ज किए। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब मामले की जांच शुरू हो गई है।
कंपनी प्रबंधन ने पुलिस को नहीं दी सूचना
उरला थाना प्रभारी रोहित मलेकर ने बताया कि सागर टीएमटी प्लांट में हुई घटना की कंपनी प्रबंधन की ओर से पुलिस को कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी। अन्य माध्यम से घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और घायलों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने मामले में कंपनी प्रबंधन के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, हादसे के कारणों के साथ ही सुरक्षा मानकों के पालन और घटना की सूचना समय पर नहीं दिए जाने के पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
हादसा हुआ या लापरवाही का नतीजा, जांच से होगा खुलासा
फर्नेस जैसे संवेदनशील औद्योगिक संयंत्र में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का पालन कितना किया जा रहा था, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है। हादसे के बाद घायल मजदूर को अस्पताल पहुंचाए जाने के बावजूद संबंधित विभागों को सूचना नहीं दिए जाने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि हादसे की जानकारी पुलिस को बाहरी माध्यम से मिलती है, तो औद्योगिक इकाई में सुरक्षा और दुर्घटना रिपोर्टिंग की व्यवस्था किस स्तर पर काम कर रही है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि घटना के समय प्लांट में सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और आपातकालीन व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
श्रम विभाग की निगरानी पर भी सवाल
मजदूरों की सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में नियमों के पालन की निगरानी करने वाले श्रम विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना के संबंध में विभाग को कब और किस माध्यम से जानकारी मिली, क्या मौके का निरीक्षण किया गया और सुरक्षा मानकों की जांच की गई या नहीं—इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
श्रमिकों से जुड़े लोगों का कहना है कि औद्योगिक दुर्घटनाओं को केवल सामान्य हादसा मानकर छोड़ने के बजाय इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
मजदूरों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं
औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन के साथ मजदूरों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में किसी भी दुर्घटना के बाद घटना की तत्काल सूचना संबंधित विभागों को देना और घायलों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। सागर टीएमटी की घटना में सूचना देने में कथित देरी और पुलिस द्वारा बाहरी माध्यम से जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई किए जाने से कई सवाल खड़े हुए हैं।
अब पुलिस जांच के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि फर्नेस ब्लास्ट किन परिस्थितियों में हुआ, सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया गया था और हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं।
मुख्यमंत्री से शिकायत करेगी श्रम सतर्कता समिति
घटना को लेकर श्रम सतर्कता समिति, धरसींवा के सदस्यों ने भी गंभीरता जताई है। समिति के सदस्यों का कहना है कि मामले को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष उठाया जाएगा। इसके लिए जल्द ही लिखित शिकायत सौंपने की तैयारी है।
समिति की ओर से उद्योगों में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच, सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित कराने, हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों से जवाब-तलब करने तथा घायल मजदूर को उचित उपचार और नियमानुसार सहायता दिलाने की मांग किए जाने की बात कही गई है।
उरला थाना प्रभारी ने रोहित मलेकर बताया कि, “सागर टीएमटी प्लांट हादसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और घटना छिपाने पर पुलिस ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ धारा 289 व 239 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने स्वयं संज्ञान लेकर घायलों के बयान दर्ज किए हैं और मामले की जांच जारी है।”
