गुरुर। नगर पंचायत गुरुर में भवन अनुज्ञा के नाम पर कथित रूप से अधिक राशि वसूलने और कम राशि की रसीद जारी किए जाने के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। मामले में दो अलग-अलग शिकायतों में बड़ी राशि लिए जाने और उसके मुकाबले कम राशि की रसीद दिए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने थाना गुरुर में आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। मामला कलेक्टर और एसपी तक भी पहुंच चुका है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पहले मामले में 1 लाख 70 हजार रुपये लिए गए, जबकि रसीद 42,613 रुपये की जारी की गई। इसी तरह दूसरे मामले में 2 लाख 65 हजार रुपये लिए जाने का आरोप है, जबकि रसीद 53,958 रुपये की बताई गई है। शिकायतकर्ताओं ने शेष राशि के हिसाब-किताब पर सवाल उठाते हुए नगर पंचायत की कैशबुक, रसीद बुक और भवन अनुज्ञा से संबंधित अभिलेखों की जांच की मांग की है।
मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ी हैं। पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने सीएमओ से मामले को लेकर जवाब मांगा। वहीं युवा कांग्रेस की ओर से भी घेराव की चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद पुलिस ने मामले में पूछताछ शुरू की है।
अध्यक्ष और सीएमओ से पूछताछ, इंजीनियर-बाबू के बयान बाकी
थाना प्रभारी मुकेश सिंह के अनुसार नगर पंचायत अध्यक्ष प्रदीप साहू और सीएमओ श्रीनिवास पटेल को बयान के लिए बुलाकर पूछताछ की गई है। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत के इंजीनियर और संबंधित बाबू का बयान अभी लिया जाना बाकी है। दोनों को बयान के लिए बुलाया गया है।
पुलिस का कहना है कि सभी संबंधित लोगों के बयान और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच के बाद कार्रवाई का सीएमओ का बयान
सीएमओ श्रीनिवास पटेल ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इधर शिकायतकर्ताओं और नगरवासियों ने पिछले कुछ वर्षों में जारी भवन अनुज्ञाओं, उनसे प्राप्त शुल्क, बैंक में जमा राशि, कैशबुक, रसीद बुक और संबंधित फाइलों की विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच केवल दो शिकायतों तक सीमित न रहकर पूरे रिकॉर्ड की होनी चाहिए, ताकि वास्तविक वित्तीय स्थिति स्पष्ट हो सके।
फिलहाल पुलिस की जांच में इंजीनियर और संबंधित बाबू के बयान तथा नगर पंचायत के दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित वसूली, राशि के अंतर और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
