रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब 15 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क पर भी 30 मीटर ऊंची यानी करीब 10 मंजिला इमारत का निर्माण किया जा सकेगा। वर्तमान में 10 मंजिला भवन के लिए कम से कम 18 मीटर चौड़ी सड़क का प्रावधान है। राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में हाईराइज भवन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग ने संशोधन का प्रारूप राजपत्र में प्रकाशित कर आम लोगों से 30 दिनों के भीतर दावा-आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित संशोधनों में कम चौड़ी सड़कों पर बहुमंजिला निर्माण की अनुमति के साथ भवन निर्माण से जुड़े कुछ प्रावधानों में छूट देने का प्रस्ताव भी शामिल है।
10 फीसदी तक विचलन मान्य करने का प्रस्ताव
प्रस्ताव के अनुसार प्राधिकारी भवन के सामने खुले स्थान, पार्किंग और भवन की ऊंचाई को छोड़कर अन्य निर्धारित प्रावधानों में 10 फीसदी तक के विचलन को जुर्माने के साथ मान्य कर सकेगा। सूचना प्राप्त होने के आठ दिनों के भीतर पूर्णता एवं अधिभोग प्रमाणपत्र जारी करने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
ऊंचाई के अनुसार सड़क और भूखंड के मानक
30 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के लिए अलग-अलग मानक निर्धारित किए गए हैं। 30 से 45 मीटर ऊंचे भवन के लिए न्यूनतम 2,000 वर्गमीटर भूखंड, 18 मीटर चौड़ी सड़क और 18 मीटर सम्मुख चौड़ाई का प्रावधान रखा गया है। 45 से 60 मीटर ऊंचे भवन के लिए 2,500 वर्गमीटर भूखंड और 24 मीटर चौड़ी सड़क जरूरी होगी।
इसी तरह 60 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के लिए न्यूनतम 3,000 वर्गमीटर भूखंड, 30 मीटर चौड़ी सड़क और 30 मीटर सम्मुख चौड़ाई का प्रस्ताव है। इन श्रेणियों में अधिकतम भूतल कवरेज 40 फीसदी रखा गया है।
9.5 से 30 मीटर तक के भवनों में भी राहत
प्रस्तावित नियमों के तहत 9.5 से 15 मीटर ऊंचाई वाले भवन के लिए न्यूनतम 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल और 12 मीटर चौड़ी सड़क का प्रावधान होगा। 15 से 24 मीटर ऊंचाई के भवन के लिए न्यूनतम 1,000 वर्गमीटर भूखंड और 12 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है।
24 से 30 मीटर ऊंचाई वाले भवन के लिए न्यूनतम 1,500 वर्गमीटर क्षेत्रफल, 15 मीटर चौड़ी सड़क और 18 मीटर सम्मुख चौड़ाई का प्रावधान रखा गया है। इन भवनों के लिए भी अधिकतम भूतल बिल्डअप एरिया 40 फीसदी निर्धारित किया गया है।
जमीन का स्वामित्व बदलने पर लेआउट नहीं होगा शून्य
संशोधन में लेआउट स्वीकृत होने के बाद भूमि का स्वामित्व बदलने की स्थिति में भी राहत देने का प्रस्ताव है। स्वामित्व हस्तांतरण और राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज होने के बाद हस्तांतरिती, अनुमोदित लेआउट में बदलाव किए बिना विकास अनुमति में आवेदक और परियोजना का नाम बदलने के लिए आवेदन कर सकेगा।
अभी ऐसे प्रावधान के अभाव में भूमि का स्वामित्व बदलने के बाद स्वीकृत लेआउट के अमान्य होने की स्थिति बनती थी। नए प्रस्ताव से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।
छोटे आवासीय भूखंडों के लिए ऑनलाइन अनुमति
प्राधिकारी 500 वर्गमीटर तक के आवासीय भूखंडों के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वतः भवन निर्माण अनुज्ञा जारी करने की व्यवस्था के निर्देश भी दे सकेगा। सरकार का उद्देश्य आवासीय, औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों में विकास को गति देना और उपलब्ध भूमि का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के आयुक्त अवनीश शरण के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों से कम चौड़ी सड़कों पर भी बहुमंजिला भवन निर्माण और भूमि के बेहतर उपयोग का रास्ता खुलेगा।
