मुंगेली। जनपद पंचायत मुंगेली अंतर्गत ग्राम पंचायत नारायणपुर के आश्रित ग्राम केशली में चल रहे मनरेगा के तालाब गहरीकरण कार्य को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कार्यस्थल की स्थिति देखने के बाद ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि जमीन पर अपेक्षाकृत कम और कागजों में ज्यादा काम दर्शाया जा रहा है। मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति और कार्य की प्रगति को लेकर पूरे मामले में संदेह गहराता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार कई मजदूर कार्यस्थल पर केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराने और फोटो खिंचाने के समय ही पहुंचते हैं, जबकि वास्तविक काम बेहद सीमित दिखाई देता है। बताया जा रहा है कि कुछ समय बाद ही कार्यस्थल लगभग खाली हो जाता है और तालाब गहरीकरण का कार्य ठप नजर आने लगता है। इससे मनरेगा के तहत संचालित कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।
पूरा मामला अब रोजगार सचिव श्रवण बंजारे की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा में आ गया है। कार्यस्थल की निगरानी, मजदूरों की नियमित उपस्थिति तथा कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होने के बावजूद मौके पर व्यवस्थाएं कमजोर दिखाई दे रही हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं योजना का संचालन केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित तो नहीं हो गया है।
ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि तालाब गहरीकरण कार्य में निर्धारित मापदंड से कम खुदाई की जा रही है। वहीं दस्तावेजों में अधिक कार्य दर्शाने की बात भी सामने आ रही है। आरोप है कि वास्तविक रूप से 30 से 40 मजदूर ही काम करते दिखाई देते हैं, जबकि फोटो और दस्तावेजों में 60 से 70 मजदूरों की उपस्थिति दर्शाई जा रही है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और भौतिक सत्यापन कराया जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों का विकास करना है, लेकिन केशली में चल रही कार्यप्रणाली ने योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
