फास्टैग के ऐनुअल पास को लेकर देश भर में एक बड़ा ऑनलाइन स्कैम तेजी से फैल रहा है। इस धोखाधड़ी की गंभीरता को देखते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI ) ने आम जनता के लिए एक अलर्ट जारी किया है। जालसाज इस ठगी को अंजाम देने के लिए बिल्कुल असली दिखने वाली फर्जी वेबसाइट्स का सहारा ले रहे हैं। ये ठग इतने शातिर हैं कि पेड एडवर्टाइजमेंट और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (स्श्वह्र) ट्रिक्स का इस्तेमाल करके अपनी इन फर्जी वेबसाइट्स को गूगल सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर ले आते हैं। एनएचएआई ने सभी वाहन चालकों को भारी आर्थिक नुकसान से बचने के लिए केवल वेरिफाइड और आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स का ही इस्तेमाल करने की सख्त हिदायत दी है।
संवेदनशील जानकारी मांगकर सीधा ठगों के खाते में जा रहा पैसा
इस स्कैम के तहत जब कोई यूजर इन फर्जी वेबसाइट्स पर पहुंचता है, तो उससे मोबाइल नंबर, गाड़ी के रजिस्ट्रेशन की जानकारी और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील डिटेल्स मांगी जाती हैं। इन वेबसाइट्स का इंटरफेस इतना असली होता है कि यूजर आसानी से झांसे में आकर पेमेंट कर देता है और सारा पैसा सीधे स्कैमर्स के खाते में पहुंच जाता है। ठगी का शिकार होने के बाद कई मामलों में तो यूजर को कोई कन्फर्मेशन मैसेज तक नहीं मिलता या फिर उन्हें एक नकली रसीद थमा दी जाती है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद भी यूजर के पास कोई वैलिड फास्टैग नहीं रह जाता।
गृह मंत्रालय की साइबर एजेंसी भी जता चुकी है चिंता
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने भी इस बढ़ते खतरे को लेकर पहले ही चेतावनी जारी कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक जालसाज हाईवे यूजर्स को अपना शिकार बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर रहे हैं। साइबर ठगों ने अपने काम करने के तरीके को इतना एडवांस कर लिया है कि आम लोगों के लिए पहली नजर में असली और नकली वेबसाइट के बीच अंतर कर पाना लगभग नामुमकिन हो गया है। इसी वजह से लोग आसानी से इस बड़े जाल में फंस रहे हैं।
फ्रॉड से सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये जरूरी कदम
एनएचएआई ने लोगों को इस ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए कई जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। अथॉरिटी के अनुसार फास्टैग ऐनुअल पास सर्विस के लिए हमेशा ‘राजमार्गयात्राÓ ऐप जैसे आधिकारिक सोर्स का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इंटरनेट पर सर्च करते समय स्पॉन्सर्ड लिंक या किसी अनजान विज्ञापन पर क्लिक करने से पूरी तरह बचना चाहिए। अपनी कोई भी निजी या पेमेंट डिटेल दर्ज करने से पहले वेबसाइट का यूआरएल दो बार चेक करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा किसी भी अनजान पोर्टल पर अपना ओटीपी, कार्ड डिटेल या लॉगिन आईडी बिल्कुल शेयर न करें। यदि कोई भी वेबसाइट आपको संदिग्ध लगती है या बेवजह की परमिशन मांगती है, तो बिना देर किए उसे तुरंत बंद कर देना ही समझदारी है।
