नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के चलते देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में जल्द ही बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में करीब 18 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 35 रुपए प्रति लीटर तक वृद्धि संभव है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी तक स्थिर रखी गई हैं, जिससे तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं।
46 दिनों में कच्चे तेल में बड़ा उछाल
बीते डेढ़ महीने में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है। 27 फरवरी को जहां कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल था, वह 19 मार्च तक बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। हालांकि 14 अप्रैल को यह घटकर 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, फिर भी यह स्तर पहले की तुलना में काफी अधिक है।
तेल कंपनियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
कच्चे तेल की महंगाई के कारण तेल कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग 18 रुपए और डीजल पर 35 रुपए का नुकसान हो रहा है। पिछले महीने कीमतों के चरम पर पहुंचने के दौरान कंपनियों को प्रतिदिन करीब 2,400 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा था। एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती के बाद यह घाटा घटकर लगभग 1,600 करोड़ रुपए प्रतिदिन रह गया है। अनुमान है कि हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी पर प्रति लीटर करीब 6 रुपए का अतिरिक्त नुकसान होता है।
आयात पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती
भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें लगभग 45 प्रतिशत मिडिल ईस्ट और 35 प्रतिशत रूस से आता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ सकता है, जो 2026 की पहली तिमाही में 20 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
**घटती एक्साइज ड्यूटी से कम हुआ सरकारी योगदान**
सरकार की आय में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का योगदान भी घटता जा रहा है। वित्त वर्ष 2017 में यह हिस्सा 22 प्रतिशत था, जो अब घटकर 8 प्रतिशत रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार पूरी एक्साइज ड्यूटी भी हटा दे, तब भी कंपनियों का मौजूदा घाटा पूरी तरह समाप्त नहीं होगा।
वैश्विक स्तर पर भी बढ़े दाम
भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका सहित कई देशों में भी ईंधन महंगा हुआ है। अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत अगस्त 2022 के बाद पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई है। वहीं पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं।
कुल मिलाकर, कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और आयात पर निर्भरता के कारण आने वाले समय में देश में ईंधन की कीमतों में वृद्धि की संभावना बनी हुई है।
