धरसींवा। औद्योगिक क्षेत्र धरसींवा में वर्षों से जारी मजदूरों के शोषण और बंधक श्रम जैसी कुप्रथाओं पर लगाम कसने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने अब अपना हंटर चला दिया है। राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप प्रशासन ने ‘अनुभाग स्तरीय सतर्कता समिति’ का गठन कर उन उद्योगपतियों को कड़ा संदेश दिया है जो श्रम कानूनों को अपनी जेब में रखकर चलते हैं। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा जारी इस आदेश के बाद अब औद्योगिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस बार समिति में क्षेत्र के प्रखर और कद्दावर सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत वर्मा को शामिल किया गया है, जो अपनी बेबाक और जनहितैषी छवि के लिए जाने जाते हैं।
समिति के सदस्य के रूप में कार्यभार संभालते ही हेमंत वर्मा ने तथाकथित उद्योगों की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं अगर मजदूरों के खून-पसीने से पैदा हो रहा है, तो ऐसी व्यवस्था को ध्वस्त करना ही अब हमारी प्राथमिकता है। वर्मा ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि उद्योगों में मजदूरों को न्यूनतम वेतन से कम देना एक अपराध है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई कारखानों में मजदूरों को बंधक बनाकर रखने और उनसे जानवरों की तरह काम लेने की शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन अब छत्तीसगढ़ शासन के इस कड़े कदम के बाद ऐसे शोषकों के दिन गिनती के बचे हैं। श्री वर्मा के तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी रसूखदार उद्योगपति की पैरवी मजदूरों के हक के आगे नहीं टिकेगी।
सामाजिक संतुलन का रखा गया है ध्यान
छग प्रशासन द्वारा गठित इस उच्च स्तरीय समिति में सामाजिक संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा गया है, जिसमें पुष्पा बंजारे, हनुमंत आदिल, भोला राम नेताम और राजीव देवांगन जैसे सदस्यों को जोड़ा गया है, जो जमीनी स्तर पर श्रमिकों की समस्याओं को उठाएंगे। प्रशासनिक मजबूती के लिए जनपद सीईओ और श्रम निरीक्षक को इस टीम का अभिन्न अंग बनाया गया है। शासन का यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि अब प्रदेश में मजदूरों के स्वाभिमान से समझौता नहीं होगा।
कागजों से निकलकर अब मैदान में उतरेगी समिति, औचक निरीक्षण से खुलेगी उद्योगों की पोल
श्रमिक हितों को लेकर छग शासन श्रम समिति के सदस्य हेमंत वर्मा ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कारखाना के जिम्मेदारो को स्पष्ट चेतावनी दी है। अपने संबोधन में उन्होंने साफ किया कि समिति की भूमिका अब केवल फाइलों और कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहने वाली है। श्री वर्मा ने ऐलान किया कि समिति की टीमें जल्द ही विभिन्न उद्योगों का औचक निरीक्षण करेंगी और मौके पर ही मजदूरों के शोषण का कच्चा चिट्ठा सार्वजनिक किया जाएगा। इस सीधी और जमीनी कार्रवाई की धमक ने उन औद्योगिक इकाइयों में हड़कंप मचा दिया है, जो अब तक प्रशासनिक ढिलाई का फायदा उठाकर श्रम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे थे। वर्मा के इस तेवर ने यह संदेश दे दिया है कि मजदूरों के हक से समझौता करने वाले संस्थानों पर अब सीधी गाज गिरेगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि औचक निरीक्षण के दौरान यदि सुरक्षा मानकों व कम मजदूरी में कमी या वेतन भुगतान में अनियमितता पाई गई, तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी।
औद्योगिक शोषण के खिलाफ क्रांतिकारी कदम- विधायक अनुज शर्मा
धरसींवा क्षेत्र के विधायक अनुज शर्मा ने औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए नवगठित ‘अनुभाग स्तरीय सतर्कता समिति’ का स्वागत करते हुए समस्त सदस्यों को अपनी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। विधायक शर्मा ने विशेष रूप से प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत वर्मा और समिति के अन्य सदस्यों के चयन को सराहनीय बताते हुए कहा कि शासन का यह निर्णय क्षेत्र में औद्योगिक शोषण को समाप्त करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समिति पूरी निष्ठा के साथ जमीनी स्तर पर कार्य करेगी और उन श्रमिकों की आवाज बनेगी जो अब तक अपने वाजिब हक और सम्मान से वंचित थे। विधायक ने जोर देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार मजदूरों के स्वाभिमान के साथ कोई समझौता नहीं करेगी और यह समिति सुनिश्चित करेगी कि उद्योगों में श्रम नियमों का सख्ती से पालन हो।
