सुकमा। सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र में खसरा नंबर 386 पर सड़क निर्माण का मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। भू-स्वामी माड़वी सत्यानारायण ने आरोप लगाया है कि उनकी स्पष्ट मनाही के बावजूद उनकी निजी जमीन पर जबरन सड़क निर्माण कराया गया।
भू-स्वामी के अनुसार, सड़क ठेकेदार डी.एस. कंस्ट्रक्शन द्वारा भूमि की सफाई के दौरान ही उन्हें मनाकर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद ठेकेदार ने काम नहीं रोका सत्य नारायण मंडावी और उनके परिवार का आरोप है कि पटवारी और तहसीलदार की कथित मिलीभगत से उनकी निजी भूमि पर जबरन सफाई करवाई गई और उसके बाद मुरूम मिट्टी डालकर सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है। कि क्या किसी भी सड़क निर्माण से पहले भूमि का विधिवत सर्वे नहीं किया गया था अगर किया जाता तो ये सब नही होता इस मामले में सर्वे क्यों नहीं हुआ भू स्वामी के बिना अनुमति के इस तरह का कार्य प्रशासनिक के लापरवाही या फिर सुनियोजित अनदेखी को दर्शाता है।
इस मामले में जब पटवारी बुधराम बघेल से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि जिस दिन काम चल रहा था, वे कार्यालयीन कार्य से तहसील कार्यालय दोरनापाल में थे और उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी नहीं थी। वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अपनी निजी जमीन सड़क के लिए देंगे, तो उन्होंने साफ कहा— “मैं 1 इंच भी जमीन नहीं दूंगा।”
अब जब एक जिम्मेदार अधिकारी खुद अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है, तो किसी अन्य व्यक्ति की निजी भूमि पर जबरन सड़क निर्माण करना कितना उचित है—यह बड़ा सवाल बन गया है।

वहीं, तहसीलदार ने भी इस मामले में साफ कहा— “भू-स्वामी अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं, तो हम डायवर्सन करके दूसरी जगह पर सड़क निर्माण करेंगे।”
इस बयान के बाद अब यह सवाल और गहरा गया है कि अगर सड़क निर्माण दूसरी जगह यानी शासकीय भूमि खसरा नंबर 422 पर ही किया जाएगा, तो निजी जमीन पर जो मुरूम मिट्टी डालकर काम किया गया है, उस पर खर्च हुई शासकीय राशि की जवाबदारी कौन लेगा?
भू-स्वामी ने बताया कि उनकी जमीन का सीमांकन पूर्व में हो चुका था। इसके बावजूद बिना जांच-पड़ताल के कार्य शुरू कर देना गंभीर लापरवाही है। उनका साफ कहना है कि वे अपनी निजी भूमि किसी भी हालत में सड़क निर्माण के लिए नहीं देंगे।
यह मामला अब केवल जमीन विवाद नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, ठेकेदार की मनमानी और आम नागरिक के अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
