सुकमा। जिले के पोंगाभेजी स्थित शासकीय बालक आश्रम में बच्चों के भोजन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार आश्रम में कुल 90 बच्चे निवास करते हैं, जिनके लिए रविवार को विशेष भोजन के रूप में चिकन बनाया गया।
नियमों के अनुसार एक बच्चे के लिए लगभग 200 ग्राम चिकन निर्धारित माना जाता है। इस हिसाब से 90 बच्चों के लिए करीब 18 किलो चिकन होना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि रविवार को केवल 3 जिंदा मुर्गे लाकर लगभग 6 किलो चिकन ही बनाया गया।
इस मामले में सवाल उठ रहे हैं कि बाकी 12 किलो चिकन का हिस्सा कहां गया। स्थानीय लोगों और बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि यह बच्चों के हक के भोजन में कटौती है। उनका आरोप है कि हॉस्टल अधीक्षक द्वारा बच्चों के हिस्से के भोजन में गड़बड़ी की जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकारी आश्रमों में भोजन की गुणवत्ता और मात्रा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। ऐसे में यदि बच्चों के हक का भोजन ही कम कर दिया जाए तो यह बेहद चिंताजनक मामला बन जाता है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
