नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब केवल चैटबॉट या ऑटोमेशन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब साइबर सिक्योरिटी जैसे गंभीर क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है। इसी दिशा में गूगल ने एक बड़ा कदम उठाते हुए नया AI Agent ‘Big Sleep’ लॉन्च किया है, जो साइबर हमले को होने से पहले ही रोकने में सक्षम है।
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गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने इस AI एजेंट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसे गूगल की DeepMind और Project Zero टीमों ने मिलकर डेवलप किया है। यह सिस्टम थ्रेट डिटेक्शन में बेहद उन्नत है और अब तक कई सिक्योरिटी वल्नरेबिलिटी (कमजोरियों) का पता लगा चुका है।
कैसे काम करता है ‘Big Sleep’?
गूगल के अनुसार, Big Sleep उन सॉफ्टवेयर सिस्टम्स में मौजूद अनजान कमजोरियों को ढूंढ निकालता है, जिनका अब तक किसी को पता नहीं होता। यह AI पहले ही थ्रेट इंटेलिजेंस की मदद से एक साइबर अटैक को रोक चुका है, जो अगर होता तो करोड़ों यूजर्स की डाटा सिक्योरिटी पर खतरा बन सकता था।
गूगल का कहना है कि Big Sleep ने एक ऐसी वल्नरेबिलिटी को भी समय रहते पहचान लिया जिसे किसी भी हैकर या थ्रेट एक्टर्स ने अभी तक इस्तेमाल नहीं किया था। यानी ये AI एजेंट न केवल सक्रिय खतरे को पहचानता है, बल्कि संभावित खतरों को भी पहले ही निष्क्रिय कर सकता है।
AI का बढ़ता दायरा
AI अब मेडिकल साइंस, एजुकेशन, ग्राहक सेवा और रिसर्च के बाद साइबर सिक्योरिटी में भी नए मानक स्थापित कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में AI आधारित सुरक्षा सिस्टम हैकिंग और साइबर जासूसी के विरुद्ध एक मजबूत दीवार साबित हो सकते हैं।
