जांजगीर-चांपा। जिले का नैला-बलौदा मार्ग कभी आवागमन का सुगम साधन था, लेकिन अब यह सड़क मौत का रास्ता बन चुका है। गड्ढों से भरी सड़क और भारी वाहनों की बेलगाम आवाजाही ने लोगों का जीवन संकट में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस हालात के लिए सिर्फ एक विभाग नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी जिम्मेदार है।
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नैला-बलौदा मार्ग की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां चलना भी खतरे से खाली नहीं। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, बिना नियंत्रण दौड़ते भारी वाहन और नियमों की धज्जियां उड़ाते ड्राइवर – यह दृश्य अब आम हो चुका है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पीडब्ल्यूडी, आरटीओ और पुलिस विभाग के अधिकारी इस स्थिति को नजरअंदाज कर रहे हैं। आरटीओ द्वारा “सड़क की क्षमता अनलिमिटेड है” जैसे गैर-जिम्मेदाराना बयान ने लोगों में और भी गुस्सा भर दिया है।
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पीडब्ल्यूडी अधिकारी जहां ग्रामीणों पर ही दोष मढ़ते नजर आए, वहीं ग्रामीणों ने बताया कि जब वे अवैध ट्रेलरों का विरोध करते हैं, तो उन्हें पैसे और रसूख की धमकी दी जाती है। कई वाहन बिना फिटनेस और बीमा के चल रहे हैं, और ड्राइवर अक्सर नशे में पाए जाते हैं।
