रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ही राजस्व निरीक्षक की विभागीय परीक्षा में गड़बड़ी का मामला गरमा गया। भाजपा विधायक राजेश मूणत, अजय चंद्राकर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया। मंत्री टंकराम वर्मा के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया और बाद में वॉकआउट कर दिया।
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भाजपा विधायक राजेश मूणत ने सवाल उठाया कि विभागीय परीक्षा में भाई-भाई, साली-जीजा जैसे रिश्तेदार एक साथ बैठाकर परीक्षा ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में गड़बड़ी उजागर होने के बावजूद अब तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मंत्री को विभाग का चार्ज लिए 9 दिन ही हुए थे और उसी दौरान परीक्षा करा दी गई।
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राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई थी। परीक्षा के बाद शिकायतें मिलने पर 5 सदस्यीय जांच समिति बनाई गई। जांच में अनियमितताएं पाई गईं। गृह विभाग को जांच का आग्रह किया गया, लेकिन बाद में इसे आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) को सौंपा गया। मंत्री ने आश्वस्त किया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मूणत ने कहा कि यदि जांच रिपोर्ट मौजूद है तो उसे सदन के पटल पर रखा जाए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार अगली विधानसभा सत्र से पहले दोषियों पर कार्रवाई करेगी? इस पर मंत्री ने कहा कि प्रयास रहेगा कि अगली बैठक से पहले कार्रवाई हो।
अजय चंद्राकर ने सवाल किया कि EOW जांच का निर्णय किसने लिया? मंत्री वर्मा ने जवाब दिया कि विभाग ने ही यह निर्णय लिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूछा कि परीक्षा किस सरकार के दौरान हुई? मंत्री ने बताया कि परीक्षा जनवरी 2024 में आयोजित हुई और रिजल्ट फरवरी में आया।
इसके बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। भूपेश बघेल ने सीबीआई जांच की मांग की, जबकि भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस को सीबीआई पर भरोसा है?
सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के चलते विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए और बाद में वॉकआउट कर गए। सदन का माहौल इस मुद्दे पर पूरी तरह गरमा गया।
