खेमेश्वर पुरी गोस्वामी. मुंगेली। जिला खनिज विभाग मुंगेली में पदस्थ शासकीय वाहन के कथित निजी उपयोग और वाहन चालक की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पथरिया तहसील के ग्राम गोइन्द्री निवासी समीर कुमार टंडन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि खनिज शाखा में उपयोग होने वाला शासकीय वाहन क्रमांक सीजी 02 एयू 0149 विभागीय कार्यों के अलावा कथित रूप से निजी आवागमन में इस्तेमाल किया जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि समाचार माध्यमों एवं स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त वाहन का चालक इसे जिला मुख्यालय से करीब 50 से 60 किलोमीटर दूर रतनपुर क्षेत्र के भैंसामुड़ा स्थित अपने निजी निवास तक ले जाता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि वाहन को कई अवसरों पर सुबह और शाम निजी आवास के आसपास खड़े देखे जाने की जानकारी सामने आई है।

शिकायत में कहा गया है कि सरकारी वाहन और अन्य संसाधनों का संचालन जनहित एवं शासकीय कार्यों के लिए होता है। ऐसे में यदि वाहन का निजी कार्यों अथवा निजी आवागमन में इस्तेमाल पाया जाता है, तो यह शासकीय नियमों के विपरीत माना जा सकता है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की दस्तावेजी और तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
चालक भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल
समीर कुमार टंडन ने खनिज विभाग में पदस्थ वाहन चालक राकेश दुबे की भर्ती चयन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चालक की नियुक्ति से संबंधित मामले में उन्होंने पूर्व में कलेक्टर जनदर्शन तथा संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म, रायपुर में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट अथवा कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी गई है।
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में मांग की है कि सरकारी वाहन के कथित उपयोग की वास्तविकता सामने लाने के लिए वाहन की लॉगबुक, जीपीएस रिकॉर्ड, ईंधन व्यय, यात्रा आदेश और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही वाहन की आवाजाही से संबंधित उपलब्ध तकनीकी रिकॉर्ड की भी पड़ताल करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि जांच में सरकारी वाहन के निजी उपयोग अथवा चालक भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले में विभागीय जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
