रायपुर। वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति के तहत हजारों वाहन खरीदार अब भी सब्सिडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 2022-23 से लेकर 2025-26 तक खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहनों पर सरकार की ओर से देय 115.85 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी अब तक जारी नहीं हो सकी है। इसका असर 52,265 ईवी वाहन मालिकों पर पड़ा है।
राज्य सरकार ने 31 अगस्त 2022 को पांच वर्ष की अवधि के लिए ईवी नीति लागू की थी। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, प्रदूषण कम करना और लोगों को स्वच्छ परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। नीति के तहत शुरुआती दो वर्षों तक पंजीयन और रोड टैक्स में 100 प्रतिशत छूट, अगले दो वर्षों तक 50 प्रतिशत तथा अंतिम वर्ष 25 प्रतिशत रोड टैक्स में राहत का प्रावधान किया गया।
इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर वाहन की कीमत का 10 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की घोषणा की गई थी। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए निर्धारित सीमा तक तथा कारों के लिए अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान रखा गया। हालांकि बाद में 10 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को सब्सिडी के दायरे से बाहर कर दिया गया। इसके बावजूद लंबित दावों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
ईवी खरीदारों का कहना है कि सरकार द्वारा घोषित प्रोत्साहन राशि समय पर नहीं मिलने से लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति उत्साह प्रभावित हो रहा है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबित सब्सिडी का शीघ्र भुगतान किया जाता है, तो राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के अभियान को नई गति मिल सकती है।
2022-23 से लंबित है भुगतान
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 (अक्टूबर तक) खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहनों पर देय सब्सिडी का भुगतान अब तक नहीं हो सका है। चार वर्षों में लंबित राशि बढ़कर 115 करोड़ 85 लाख 3 हजार 525 रुपये पहुंच गई है।
वित्तीय वर्षवार लंबित सब्सिडी वित्तीय वर्ष वाहन लंबित सब्सिडी
2022-23 3,669 ₹7.44 करोड़
2023-24 15,938 ₹34.98 करोड़
2024-25 24,125 ₹52.19 करोड़
2025-26 (अक्टूबर तक) 8,533 ₹21.22 करोड़
कुल 52,265 ₹115.85 करोड़
