नई दिल्ली/चेन्नई। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष K. Annamalai ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा नेतृत्व ने उनके इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। अन्नामलाई के इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और उनकी अगली राजनीतिक पारी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
भाजपा द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin ने अन्नामलाई का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी Arun Singh के हस्ताक्षर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अन्नामलाई अब भारतीय जनता पार्टी के प्राथमिक सदस्य नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से अन्नामलाई पार्टी संगठन में हाशिए पर महसूस कर रहे थे। इस्तीफे से पहले उन्होंने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah तथा भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात भी की थी। माना जा रहा था कि पार्टी नेतृत्व उन्हें मनाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अंततः उन्होंने भाजपा छोड़ने का फैसला कर लिया।
अन्नामलाई ने वर्ष 2020 में भाजपा का दामन थामा था। पार्टी में शामिल होने के महज 10 महीने के भीतर उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया, जिससे वे राज्य इकाई के सबसे युवा अध्यक्षों में शामिल हुए। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में वे स्वयं चुनाव हार गए थे, लेकिन उनके नेतृत्व में भाजपा ने चार सीटें जीतकर लगभग दो दशक बाद तमिलनाडु विधानसभा में वापसी की थी।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उनके नेतृत्व में तमिलनाडु में भाजपा का वोट शेयर 3.66 प्रतिशत से बढ़कर 11.24 प्रतिशत तक पहुंच गया था। हालांकि भाजपा और AIADMK के बीच गठबंधन संबंधी राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा था।
इधर, अन्नामलाई के भाजपा छोड़ने की अटकलों के बीच मदुरै में लगाए गए पोस्टरों ने भी राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी थीं। इन पोस्टरों में अन्नामलाई को दक्षिण भारतीय फिल्म सितारों Rajinikanth और Ajith Kumar के साथ दिखाया गया था। राजनीतिक गलियारों में इन पोस्टरों को उनके समर्थकों की ओर से नए राजनीतिक विकल्पों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अन्नामलाई के इस्तीफे को तमिलनाडु में भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वे भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल का रुख करेंगे या फिर अपनी नई राजनीतिक राह स्वयं तैयार करेंगे।
