पश्चिम बंगाल बॉर्डर का 600 किलोमीटर का एक हिस्सा ऐसा है, जहां बांग्लादेश के साथ सीमा पूरी तरह खुली है। कोई फेंसिंग नहीं है। यहां बीते दिनों जब बीएसएफ की टीम बॉर्डर नापने के लिए पहुंची तो गांव वालों ने मिठाइयां बांटी। यह इलाका है मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी बाजार में जीरो लाइन पर बसा सकारपाड़ा गांव।
4 हजार की आबादी और 2500 मतदाता। इनमें 95% लोग खेती पर निर्भर हैं। गांव का भूगोल बेहद संवेदनशील है। घर खत्म होते ही खेत आ जाते हैं और खेत खत्म होते ही बांग्लादेश। ग्राम पंचायत सदस्य पिंटू मंडल का घर गांव में सबसे आखिर में है। परिवार के पास 30 बीघा जमीन है।
स्थानीय बोले- शाम 5 बजे के बाद अपने खेतों में नहीं जा पाते थे
स्थानीय ने बताया कि हमें शाम 5 बजे के बाद अपने खेतों में जाने की अनुमति नहीं है, लेकिन बांग्लादेश के लोग कभी भी हमारे खेतों में घुस आते हैं और फसलें काटकर ले जाते हैं। बीते 30 साल में ऐसा कोई भी महीना नहीं बीता, जब उनसे विवाद न हुआ हो, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि बीएसएफ ने फेंसिंग लगानी शुरू कर दी है।
वहां से जैसे कोई हरकत होती, जवान माइक से चेतावनी दे देते। इसलिए हमें उम्मीद रहती है कि रात को जैसी फसल छोड़ेंगे, सुबह वैसी मिलेगी। अब तो हम भी अराजक बांग्लादेशियों को ताल ठोककर चुनौती दे रहे हैं।
