छुईखदान। सुशासन का ढोल पीटने वाली सरकार के नाक के नीचे छुईखदान में खुली डकैती चल रही है। जनता के पानी पर दबंग ने ताला जड़ दिया है! ग्राउंड के सामने बने अवैध कॉम्प्लेक्स के अंदर सार्वजनिक हैंडपंप को कब्जा कर लिया गया। खिलाड़ी बूंद-बूंद को तरस रहे हैं, ठेले वाले हलक सुखा रहे हैं, पर नगर पंचायत के अफसर आंख मूंदे बैठे हैं। सांसद-विधायक को जनता की प्यास से कोई वास्ता नहीं। वो केवल वोट मांगने आयेंगे, बाकी समय आपसे कोई लेना देना नहीं।
दरअसल, मामला छुईखदान नगर पंचायत के मुख्य खेल ग्राउंड के सामने का है। यहां सालों से लगा सरकारी हैंडपंप हजारों लोगों की प्यास बुझाता था। सुबह-शाम प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ी, ग्राउंड के बाहर शहीद स्मारक के पास ठेला-खोमचा लगाने वाले गरीब, राहगीर – सबका सहारा था। मगर रसूखदार ने ग्राउंड के ठीक सामने अवैध कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया और हैंडपंप को अपनी चारदीवारी में कैद कर लिया। अब आलम ये है कि कॉम्प्लेक्स के अंदर बोरिंग धड़ल्ले से चल रही है, और बाहर जनता पानी के लिए बिलबिला रही है। खेलने आए बच्चे बोतल लेकर भटक रहे हैं। ठेले वाले 20 रुपए की बोतल खरीदने को मजबूर हैं। नगर पंचायत का अमला तमाशा देख रहा है।
शिकायतों का पुलिंदा, अफसरों की कुंभकर्णी नींद
लोगों ने नगर पंचायत से लेकर कलेक्टर तक गुहार लगाई पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पानी को लेकर परेशान लोगों का गुस्सा कभी भी फूट पड़ेगा। नगर पंचायत के बाबू-कर्मचारी तो जैसे जुबान सिलकर बैठे हैं। रसूखदार के आगे सबकी बोलती बंद। लोग खुलेआम कह रहे हैं – “अफसरों की जेब गर्म हुई है, तभी तो चुप हैं।”
सीएमओ बोले ‘जांच करेंगे’, जनता बोली ‘कब तक?
जब आग मीडिया तक पहुंची तो नगर पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुलदीप झा की नींद टूटी। कैमरे पर घिसा-पिटा बयान दे दिया – एसडीएम तहसीलदार के साथ मामले की जांच करते हैं। कब्जा हुआ है तो खाली कराएंगे।” सवाल ये है कि जांच कब पूरी होगी? जनता कब तक प्यासी मरेगी? अवैध कॉम्प्लेक्स बना कैसे? एनओसी किसने दी? अफसरों की मिलीभगत के बिना ये गड़बड़ी मुमकिन नहीं है।
भाजपा नेता की हुंकार: ‘मंत्रालय तक जाएंगे’
भाजपा नेता व सामाजिक कार्यकर्ता संदीप महोबिया ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। आग उगलते हुए बोले – “छुईखदान में गुंडागर्दी नहीं चलेगी। सुशासन की सरकार है, किसी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा। सार्वजनिक हैंडपंप पर कब्जा जनता के मुंह का निवाला छीनना है। भीषण गर्मी का समय है। आदमी के साथ जीव जंतु के लिए भी पानी बेहद जरूरी है। स्थानीय से लेकर मंत्रालय और मुख्यमंत्री तक शिकायत करेंगे। जल्द हैंडपंप कब्जा मुक्त नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन होगा।”
सांसद-विधायक कहां हो?
सबसे शर्मनाक बात ये है कि क्षेत्र के सांसद, विधायक और तमाम जनप्रतिनिधि इस ‘जल-संकट’ पर मुंह में दही जमाए बैठे हैं। वोट के वक्त घर-घर पानी और विकास का वादा करने वाले नेता अब ग्राउंड का चक्कर तक नहीं लगा रहे। जनता पूछ रही है – हमारा वोट लेकर AC में सो गए क्या?कब्जा को लेकर छुईखदान की फिजा गर्म है। अवैध कॉम्प्लेक्स किसके आशीर्वाद से बना? सरकारी हैंडपंप निजी बाउंड्री में कैसे गया? नगर पंचायत वाकई कार्रवाई करेंगा या फिर ‘जांच’ के नाम पर लीपापोती होगी? वहीं एक बात साफ है – पानी जनता का हक है, किसी रसूखदार की जागीर नहीं। अगर हफ्तेभर में हैंडपंप आजाद नहीं हुआ तो छुईखदान की सड़कें गवाह बनेंगी। क्योंकि प्यास जब हद से बढ़ जाए, तो कुर्सियां हिल जाती हैं।
