रायपुर। करीब 13 साल पुराने भर्ती फर्जीवाड़े में आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। फर्जी अंकसूची के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोप में राज्य जीएसटी विभाग ने अपने दो कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा ने मंगलवार को किशोर पटेल और भागवत पटेल की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के आदेश जारी किए। दोनों पर वर्ष 2013 में भृत्य (चतुर्थ श्रेणी) भर्ती के दौरान कक्षा आठवीं की कथित फर्जी अंकसूची प्रस्तुत कर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप था।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 की भर्ती प्रक्रिया में दोनों अभ्यर्थियों ने कक्षा आठवीं की अंकसूची में 96 प्रतिशत से अधिक अंक दर्शाए थे। इन्हीं अंकों के आधार पर वे मेरिट सूची में शामिल हुए और सरकारी नौकरी पाने में सफल रहे। बाद में विभागीय पदोन्नति के बाद दोनों सहायक ग्रेड-3 के पद तक पहुंच गए।
शिकायत से खुली फर्जीवाड़े की परतें
यह मामला उस समय तूल पकड़ गया जब मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद बलौदाबाजार के कुछ लोगों ने दोनों कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता पर गंभीर सवाल उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित मिडिल स्कूल की परीक्षा परिणाम पंजी को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि दोनों की अंकसूचियां फर्जी हैं।
बाद में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। दस्तावेजों के अनुसार, समतुल्यता परीक्षा में अनुपस्थित परीक्षार्थियों के रोल नंबर का उपयोग कर कथित रूप से फर्जी अंकसूचियां तैयार की गई थीं। आरोप यह भी लगे कि तत्कालीन प्रधान पाठक, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सारंगढ़ और जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार की मिलीभगत से पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।
पहले मिली क्लीन चिट, फिर विधानसभा में हुआ खुलासा
शिकायत मिलने के बाद जीएसटी विभाग ने संबंधित शिक्षा अधिकारियों से अंकसूचियों का सत्यापन कराया था। उस समय अधिकारियों ने दस्तावेजों को सही बताते हुए अपनी रिपोर्ट भेज दी थी। लेकिन बाद में विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के दौरान मामला उठने के बाद जांच की दिशा बदल गई। विस्तृत जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विभाग ने दोनों कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया।
पहले भी विवादों में रहा था एक कर्मचारी
किशोर पटेल का नाम इससे पहले भी विभागीय विवादों के कारण सुर्खियों में रह चुका है। कर्मचारी संघ का नेता बनने के बाद तत्कालीन विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव के साथ टाइपिंग कार्य को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद उसने कर्मचारी संघ और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी थी। यह मामला उस समय भी मीडिया में चर्चा का विषय बना था।
सिर्फ बर्खास्तगी या होगी आपराधिक कार्रवाई भी?
दो कर्मचारियों की बर्खास्तगी के बावजूद कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन शिक्षा अधिकारियों पर फर्जी दस्तावेजों का सत्यापन करने और कथित संरक्षण देने के आरोप हैं, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करना गंभीर आपराधिक अपराध है। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
