रायपुर। राजधानी रायपुर में विकास के नाम पर खड़ा किया गया एक और ढांचा अब लोगों की जान पर भारी पड़ सकता है। रायपुर रेलवे स्टेशन से अटल एक्सप्रेस-वे और गुढ़ियारी की ओर जाने वाले अंडरब्रिज पर बने शेड की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तकनीकी जानकारों का साफ कहना है कि यह शेड 70 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा की रफ्तार भी सहन नहीं कर पाएगा। ऐसे में यह ढांचा किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता है।
निर्माण मानकों के अनुसार किसी भी शेड या कवरिंग स्ट्रक्चर के लिए अलग से मजबूत फाउंडेशन और स्वतंत्र कॉलम अनिवार्य होते हैं। लेकिन गुढ़ियारी अंडरब्रिज में इन नियमों को ताक पर रख दिया गया। पूरे शेड को महज 8 एमएम सरिया पर खड़ा कर दिया गया है, जो सुरक्षा मानकों के लिहाज से बेहद कमजोर माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के ढांचे में कम से कम 12 एमएम सरिया के पिलर और सुदृढ़ नींव जरूरी होती है, ताकि हवा के दबाव और भार को सहा जा सके।
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कम गहराई, ज्यादा जोखिम
अंडरब्रिज के दोनों ओर खड़े किए गए पिलर केवल दो फीट की खोदाई पर टिकाए गए हैं। कई स्थानों पर पुरानी दीवार को काटकर पिलर फिट कर दिए गए हैं। कंक्रीट की पैचिंग असमान और कमजोर दिखाई देती है, वहीं कई जगह सरिया बाहर निकली हुई है। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि निर्माण प्रक्रिया में गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों से समझौता किया गया है।
आरसीसी पर भी सवाल
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि, सामान्य परिस्थितियों में आरसीसी (रिइनफोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट) इतनी आसानी से नहीं टूटती। लेकिन यहां दिखाई दे रही दरारें और कमजोर संरचना इस बात की ओर इशारा करती हैं कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी संदिग्ध है। सिविल इंजीनियर सुनील पलांदुरकर के अनुसार, “70 किमी प्रति घंटे की हवा में यह शेड कभी भी गिर सकता है। इसे अलग फाउंडेशन और कॉलम पर बनाया जाना चाहिए था। केवल 8 एमएम रॉड पर आरसीसी को टिकाना बेहद खतरनाक है। इसकी तकनीकी जांच जरूरी है।”

पहले भी हो चुका है हादसा
देवेंद्र नगर चौक पर पहले बनाए गए शेड की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ चुके हैं। वहां छह फीट की खोदाई में पिलर खड़े कर शेड बनाया गया था, जो तेज हवा में गिर गया। उस हादसे में कई लोग उसकी चपेट में आ गए थे। बावजूद इसके, गुढ़ियारी अंडरब्रिज में उससे भी कम गहराई में पिलर खड़ा करना प्रशासन और ठेकेदार की लापरवाही को उजागर करता है।
कागजों में नियम, जमीन पर लापरवाही
नियमों के मुताबिक ऐसे निर्माण से पहले फाउंडेशन डिजाइन, भार वहन क्षमता और हवा के दबाव का तकनीकी परीक्षण अनिवार्य होता है। लेकिन मौके की स्थिति देखकर लगता है कि या तो बिना तकनीकी स्वीकृति के काम किया गया है या फिर कागजों पर नियम पूरे कर जमीनी हकीकत में लापरवाही बरती गई है। विशेषज्ञों का आरोप है कि इस शेड निर्माण में ठेकेदार ने लाखों रुपये की गड़बड़ी की है।
तत्काल जांच की मांग
स्थानीय लोग और तकनीकी जानकार इस निर्माण की तत्काल जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं की गई तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है।
अधिकारियों का जवाब
सीनियर डीसीएम अवधेश त्रिवेदी ने कहा कि संबंधित इंजीनियर को भेजकर अंडरब्रिज का निरीक्षण कराया जाएगा। यदि गुणवत्ता में किसी भी तरह की कमी पाई गई तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
