रायपुर। पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के साथ ही अधिकारियों के कॉल साइन बदल दिए गए हैं। पुलिस कमिश्नर का कॉल साइन अब ईगल होगा। वे वायरलेस सेट पर इसी कॉल साइन से बातचीत करेंगे और संदेशों का आदान-प्रदान करेंगे। एडिशनल पुलिस कमिश्नर को हॉक के नाम से पुकारा जाएगा। शहर के तीनों जोन रायपुर सेंट्रल, नार्थ, वेस्ट के साथ क्राइम, ट्रैफिक और महिला संबंधी अपराध के अधिकारियों के लिए भी कॉल साइन तय कर दिए गए हैं।
इन्हें ब्रावो, चार्ली, विक्टर, फाल्कन, ईको और ऑस्कर के नाम से पुकारा जाएगा। थानेदार का कॉल साइन मोबाइल होगा। कॉल साइन तो तय हो गए हैं, लेकिन अधिकारियों की बैठक व्यवस्था अभी पूरी तरह तय नहीं हो पाई है। पुलिस कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर और हेडक्वार्टर डीसीपी कमिश्नर कार्यालय में बैठेंगे। रायपुर सेंट्रल के डीसीपी सिविल लाइन स्थित सी-4 भवन में बैठेंगे।
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वहीं एडिशनल डीसीपी और सिविल लाइन एसीपी भी यहीं बैठेंगे। रायपुर वेस्ट के डीसीपी और एडिशनल डीसीपी आमानाका थाना के ऊपर बैठ रहे हैं। रायपुर नार्थ के डीसीपी कलेक्टोरेट स्थित पुराने एसपी कार्यालय में बैठ रहे हैं। नार्थ जोन के लिए उरला इलाके में नए कार्यालय की तलाश की जा रही है। ट्रैफिक डीसीपी कालीबाड़ी में और साइबर एंड क्राइम डीसीपी सिविल लाइन में बैठेंगे।
माइक-1, माइक-2 से बदला पुलिस का कॉल साइन…
- पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला का कॉल साइन ईगल होगा।
- एडिशनल कमिश्नर अमित कांबले का कॉल साइन हॉक होगा।
- रायपुर नार्थ के डीसीपी मयंक गुर्जर ब्रावो-1 होंगे। नार्थ जोन में पदस्थ अधिकारी ब्रावो-1, 2, 3 के रूप में जाने जाएंगे।
- रायपुर सेंट्रल के डीसीपी उमेश प्रसाद गुप्ता चार्ली-1 होंगे। यहां के अधिकारी चार्ली-1, 2, 3 कहलाएंगे।
- रायपुर वेस्ट के डीसीपी संदीप पटेल विक्टर-1 होंगे। यहां के अधिकारी विक्टर-1, 2, 3, 4 होंगे।
- क्राइम एंड साइबर डीसीपी राजनाला स्मृतिक फाल्कन-1 होंगे। यहां के अधिकारी फाल्कन-1, 2, 3 होंगे।
- ट्रैफिक डीसीपी विकास कुमार ईको-1 होंगे। यहां के अधिकारी ईको-1, 2, 3, 4 होंगे।
- हेडक्वार्टर डीसीपी डॉ. अर्चना झा ऑस्कर-1 होंगी। यहां के अधिकारी ऑस्कर-1, 2, 3 होंगे।
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अगले माह लेगी पुलिस कोर्ट
फरवरी से पुलिस कोर्ट के संचालन की शुरुआत होगी। इसके लिए कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। कोर्ट के लिए जगह भी तय नहीं किया गया। इसलिए अभी आरोपियों को एडीएम और एसडीएम कोर्ट में पेश किया जा रहा है। पुलिस कोर्ट शुरू होने के बाद भी एडीएम और एसडीएम के समक्ष आरोपियों को पेश किया जा सकेगा, क्योंकि अधिकारियों का बंटवारा किया गया है, इसमें किसी तरह की कटौती नहीं हुई है।
