रायपुर। राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राजा राम नाला और उससे लगी शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस पूरे प्रकरण में नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि शिकायत के एक माह बाद भी न तो सीमांकन रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है।
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने बताया कि, 30 दिसंबर 2025 को उन्होंने राजा राम नाला, जो अमलीडीह से होकर वीआईपी रोड के पास से गुजरता है, उसके किनारे स्थित लगभग एक एकड़ शासकीय भूमि और नाले में हो रहे बेजा कब्जे की लिखित शिकायत नगर निगम आयुक्त विश्वदीप से की थी। शिकायत के बाद नगर निगम आयुक्त ने रायपुर एसडीएम को पत्र लिखकर संबंधित शासकीय भूमि और नाले का सीमांकन कराने के निर्देश दिए थे।
तिवारी ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सीमांकन रिपोर्ट न तो सार्वजनिक की गई और न ही इसकी प्रति उपलब्ध कराई गई। 2 फरवरी को उन्होंने पुनः नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर सीमांकन रिपोर्ट की मांग की, लेकिन आज तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई।
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि हाल ही में समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी मिली कि उक्त शासकीय भूमि और नाले में हो रहे अवैध कब्जे पर कार्रवाई की जा रही है। इस सूचना के बाद उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण में यह सामने आया कि कार्रवाई के नाम पर केवल एक छोटी सी दीवार को गिराया गया है, जबकि नाले की दिशा आज भी पूर्ववत बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई केवल औपचारिकता और खानापूर्ति तक सीमित है।
आकाश तिवारी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई आम नागरिक अपनी खरीदी हुई भूमि पर नगर निगम से नक्शा पास कराकर मकान बनवाता है और यदि उसका छज्जा भी थोड़ा सा बाहर निकल जाए, तो निगम अधिकारी तत्काल तोड़फोड़ की कार्रवाई कर देते हैं। लेकिन शहर के मध्य स्थित एक पॉश इलाके में शासन-प्रशासन की आंखों के सामने भूमाफिया द्वारा बड़े पैमाने पर शासकीय भूमि और नाले पर कब्जा किया जा रहा है, और प्रशासन मौन बना हुआ है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजधानी रायपुर को भूमाफियाओं के लिए चारागाह बनाया जा रहा है। क्या नगर निगम की कार्रवाई केवल सड़क किनारे छोटी दुकानों और गरीबों के छोटे मकानों तक ही सीमित रह गई है, जबकि करोड़ों की बेशकीमती शासकीय भूमि पर खुलेआम कब्जा हो रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि जानकारों के अनुसार लगभग एक एकड़ शासकीय भूमि और नाले पर अवैध कब्जा किया गया है। इसके बावजूद अब तक न तो किसी भूमाफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और न ही सीमांकन रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने इसे किसी बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा बताया और कहा कि प्रशासन किसे बचाने का प्रयास कर रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए।
आकाश तिवारी ने निगम और जिला प्रशासन से मांग की कि संबंधित शासकीय भूमि और नाले का स्पष्ट सीमांकन कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही अवैध कब्जे में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि शासकीय भूमि और नाले को चिन्हित कर ईंट का घेरा बनवाकर उसे सुरक्षित किया जाए।
नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि इस बेशकीमती शासकीय भूमि और नाले पर हुए अवैध कब्जे के मामले में नगर निगम और जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई नहीं की, तो सड़क से सदन तक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि राजधानी के भविष्य और प्रशासन की जवाबदेही का सवाल है, जिसका जवाब जनता को मिलना चाहिए।
