देशभर में बढ़ते डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कामन काज सहित अन्य स्वयंसेवी संगठनों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों या रेबिज जैसी गंभीर बीमारियों से प्रभावित लोगों को राज्य सरकारों के साथ-साथ डॉग लवर्स को भी बड़ा हर्जाना देना होगा।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी को कुत्तों से इतना ही प्रेम है, तो वे सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों को अपने घरों में गोद लें। सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों के कारण आम नागरिकों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती।
स्वयंसेवी संगठनों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि देश में अब तक 30 से अधिक लोगों की मौत कुत्तों के काटने के कारण हो चुकी है। छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में यह समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। राजधानी रायपुर की स्थिति पर नजर डालें तो शायद ही कोई ऐसा वार्ड हो जहां रात के समय काम से लौटने वाले लोग डॉग बाइट की चपेट में न आते हों। घनी आबादी वाले इलाकों और तंग गलियों में मासूम बच्चों पर कुत्तों के हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिनमें कई बच्चों की जान तक चली गई है।
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कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जाहिर की कि नगर निगम, नगर पालिका और पशुपालन विभाग द्वारा कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण कार्यक्रमों को गंभीरता से लागू नहीं किया जा रहा है। इसी लापरवाही के चलते आम नागरिकों को आए दिन डॉग बाइट का शिकार होना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का हाईकोर्ट अधिवक्ता जेडी वाजपेयी और दीपाली पांडे ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे आम लोगों की सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक और सराहनीय निर्णय बताया। साथ ही राज्य सरकार से आग्रह किया कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके।
